शशि थरूर ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर भारत सरकार से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत को अब आगे बढ़कर इस युद्ध को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहल करनी चाहिए। उनके अनुसार, भारत की वैश्विक साख और संतुलित विदेश नीति उसे शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता देती है।
संघर्ष से किसी का फायदा नहीं
थरूर का मानना है कि मौजूदा हालात में न तो अमेरिका को और न ही ईरान को इस संघर्ष से कोई वास्तविक लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष अपने-अपने लक्ष्यों को काफी हद तक हासिल कर चुके हैं, ऐसे में संघर्ष को जारी रखना केवल नुकसान ही बढ़ा रहा है। यह स्थिति वैश्विक स्थिरता के लिए भी खतरा बनती जा रही है।
वैश्विक आपूर्ति पर गहरा असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। तेल, गैस और अन्य आवश्यक संसाधनों की आपूर्ति बाधित हो रही है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की परिस्थितियों में जल्द से जल्द शांति बहाल करना सभी देशों के हित में है।
भारत की संतुलित विदेश नीति की भूमिका
भारत लंबे समय से वैश्विक मंच पर एक संतुलित और जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में देखा जाता रहा है। ऐसे में थरूर का मानना है कि भारत इस संकट में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत की कूटनीतिक पहल से इस संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।
शांति की दिशा में संभावनाएं
थरूर के अनुसार, वर्तमान स्थिति एक ऐसे मोड़ पर पहुंच चुकी है जहां दोनों पक्षों के लिए संघर्ष समाप्त करना ही बेहतर विकल्प है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर भारत, इस दिशा में ठोस कदम उठाएंगे ताकि वैश्विक शांति और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
Comments (0)