सिक्किम: सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन समराडुंग-मामरिंग सुरंग में हुए भीषण हादसे के बाद राज्य सरकार ने जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया है। हादसे में अब तक 10 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 12 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। कई मजदूरों के अब भी सुरंग में फंसे होने की आशंका है। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग और राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने घटनास्थल का दौरा कर बचाव कार्यों की समीक्षा की। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की भी घोषणा की है।
हादसे की जांच के लिए एसआईटी का गठन
सिक्किम सरकार ने निर्माणाधीन समराडुंग–मामरिंग सुरंग हादसे की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने सोमवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों की गहन जांच कराई जाएगी। सरकार का कहना है कि जांच तत्काल प्रभाव से शुरू होगी और हादसे के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति या एजेंसी को बख्शा नहीं जाएगा। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि हादसे के हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
मुख्यमंत्री ने किया मुआवजे का ऐलान
दुर्घटनास्थल का दौरा करने पहुंचे मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिजन को 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। इसके साथ ही हादसे में घायल प्रत्येक मजदूर को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का भी ऐलान किया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों तक हर संभव सहायता जल्द से जल्द पहुंचाई जाए। उन्होंने कहा कि सरकार इस कठिन समय में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और उन्हें हर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
राज्यपाल ने भी लिया बचाव कार्यों का जायजा
सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने भी दुर्घटनास्थल का दौरा कर चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और अन्य बचाव एजेंसियों के अधिकारियों से बातचीत कर अभियान की प्रगति की जानकारी ली। राज्यपाल ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सुरंग में फंसे मजदूरों को सुरक्षित निकालने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग किया जाए। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग भी इस दौरान मौजूद रहे और दोनों नेताओं ने बचाव दलों का उत्साहवर्धन किया। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि बचाव अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर नहीं निकाल लिया जाता।
भारी बारिश और भूस्खलन बना हादसे की वजह
अधिकारियों के अनुसार यह दर्दनाक हादसा लगातार हो रही भारी बारिश के कारण हुए बड़े भूस्खलन के बाद हुआ। भूस्खलन की वजह से निर्माणाधीन सुरंग का एक हिस्सा अचानक ढह गया, जिससे अंदर काम कर रहे कई मजदूर मलबे में फंस गए। अब तक 10 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 12 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। हालांकि आशंका जताई जा रही है कि 18 या उससे अधिक मजदूर अभी भी सुरंग के भीतर फंसे हो सकते हैं। एनडीआरएफ सहित कई बचाव एजेंसियां युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं और लगातार मलबा हटाने का काम जारी है।
सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है यह सुरंग
करीब 250 मीटर लंबी समराडुंग–मामरिंग सुरंग सिक्किम की पहली दोहरी लेन वाली सुरंग है। इसका निर्माण रंगपो के निकट मामरिंग और नामची के बीच किया जा रहा है। यह सुरंग राष्ट्रीय राजमार्ग-10 पर तीस्ता चरण-4 जलविद्युत परियोजना के समीप स्थित है और सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। परियोजना पूरी होने के बाद गंगटोक और नाथुला दर्रे के बीच संपर्क बेहतर होने की उम्मीद थी। इससे पर्यटकों के साथ-साथ सैन्य वाहनों की आवाजाही भी अधिक सुगम होती। लेकिन परियोजना पूरी होने से पहले ही हुए इस दर्दनाक हादसे ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है।