कोलकाता में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करते हुए स्मृति ईरानी ने तृणमूल कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। प्रेस वार्ता में उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर तृणमूल के रुख को कठघरे में खड़ा किया और इसे “महिला विरोधी सोच” करार दिया।
महिला आरक्षण विधेयक पर विरोध का आरोप
स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य महिलाओं को राजनीति में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देना है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने इसका समर्थन करने के बजाय विरोध का रुख अपनाया।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम है, लेकिन विपक्षी दलों का रवैया इसके उद्देश्य को कमजोर करने वाला है।
‘महिलाओं के साथ विश्वासघात’ का आरोप
ईरानी ने कहा कि यह केवल राजनीतिक मतभेद नहीं बल्कि देश की महिलाओं के साथ “विश्वासघात” है। उनके अनुसार, जब देशभर में महिलाएं अधिक भागीदारी की मांग कर रही हैं, तब कुछ दल इस सुधार का विरोध कर रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस विधेयक के समर्थन में कोई सकारात्मक भूमिका नहीं निभाई, जिससे महिलाओं के हितों पर प्रतिकूल असर पड़ा।
विकास और प्रतिनिधित्व पर बहस
भाजपा नेता ने यह भी कहा कि यदि इस विधेयक को व्यापक समर्थन मिलता, तो राज्यों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ने के साथ-साथ विकास योजनाओं और संसाधनों के आवंटन में भी महिलाओं की भागीदारी मजबूत होती।
उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे राज्य की महिलाओं को सीधा लाभ मिल सकता था।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
इस पूरे मामले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा ने इसे महिला अधिकारों का मुद्दा बताया है, जबकि तृणमूल की ओर से इस पर पलटवार की संभावना बनी हुई है।