कोलकाता: आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी और सीमा पार अपराधों पर लगाम लगाने की रणनीति के बीच पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की दिल्ली यात्रा चर्चा में रही। मंगलवार, 13 अक्टूबर को मुख्यमंत्री नई दिल्ली में पहली BIMSTEC गृह मंत्रियों की बैठक से जुड़े रात्रिभोज में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। इस कार्यक्रम की मेजबानी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की। मुख्यमंत्री ने दिल्ली रवाना होने से पहले रणाघाट में दुर्गा पूजा पंडाल के उद्घाटन के दौरान अपनी यात्रा की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि गृह मंत्रालय के निमंत्रण पर वह दिल्ली जा रहे हैं और कार्यक्रम पूरा करने के बाद उसी रात कोलकाता लौट आएंगे।
यह आयोजन ऐसे समय हुआ, जब बंगाल की खाड़ी से जुड़े देशों के सामने सीमा पार अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और साइबर अपराध जैसी चुनौतियां क्षेत्रीय सहयोग की जरूरत को सामने ला रही हैं। BIMSTEC के सात सदस्य देशों - भारत, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड के प्रतिनिधियों ने इस बैठक में हिस्सा लिया।

बंगाल की भौगोलिक स्थिति क्यों है अहम?
पश्चिम बंगाल की सुरक्षा चुनौतियां केवल राज्य की आंतरिक कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं। बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा और नेपाल-भूटान से भौगोलिक निकटता के कारण राज्य पूर्वी भारत की सीमा सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। सीमा पार अपराध, मानव तस्करी और मादक पदार्थों की अवैध आवाजाही पर नियंत्रण के लिए केंद्रीय एजेंसियों और राज्य की सुरक्षा इकाइयों के बीच समन्वय जरूरी है।
इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी से लगी तटीय स्थिति समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिहाज से भी राज्य को महत्वपूर्ण बनाती है। ऐसे में क्षेत्रीय सुरक्षा पर होने वाली चर्चा का पश्चिम बंगाल से सीधा संबंध है।
बैठक में सुरक्षा सहयोग को लेकर क्या हुआ?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई BIMSTEC की पहली गृह मंत्रियों की बैठक में सदस्य देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया। बैठक में आतंकवाद, सीमा पार संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, कट्टरपंथ और साइबर खतरों से निपटने के मुद्दे प्रमुख रहे।
14 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, बैठक में दिल्ली घोषणा-पत्र को अपनाया गया और सुरक्षा सहयोग से जुड़े कई समझौतों को मंजूरी दी गई। इनमें खुफिया जानकारी साझा करने, कानूनी सहायता, भगोड़े अपराधियों की वापसी और साइबर अपराधों की जांच में सहयोग जैसे विषय शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल के लिए क्या है इसका महत्व?
BIMSTEC की पहल का महत्व इस बात में है कि सीमा पार होने वाली आपराधिक गतिविधियों से निपटने के लिए केवल एक देश की कार्रवाई पर्याप्त नहीं होती। सदस्य देशों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और जांच एजेंसियों का समन्वय ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को बैठक से जुड़े रात्रिभोज में आमंत्रित किया जाना पश्चिम बंगाल की रणनीतिक स्थिति के संदर्भ में उल्लेखनीय है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर मुख्यमंत्री की इस कार्यक्रम में भागीदारी को किसी अलग द्विपक्षीय समझौते या राज्य के लिए घोषित नई सुरक्षा योजना से जोड़ना उचित नहीं होगा।
फिलहाल, इस बैठक का व्यापक उद्देश्य बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना है। पश्चिम बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्य के लिए इस सहयोग का वास्तविक महत्व आने वाले समय में सीमा प्रबंधन, तस्करी पर नियंत्रण और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के रूप में सामने आ सकता है।