कोलकाता के तिलजला इलाके में स्थित एक चमड़ा फैक्ट्री में लगी भीषण आग ने दो श्रमिकों की जान ले ली, जबकि दो अन्य कर्मचारी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। हादसे के बाद फैक्ट्री प्रबंधन की कार्यशैली और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस ने मामले में अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया है और पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है।
मृतकों की पहचान, दो कर्मचारी वेंटिलेटर पर
इस हादसे में 40 वर्षीय मोहम्मद हसनुज्जामान और 35 वर्षीय राजेश अली मंडल की मौत हो गई। वहीं गंभीर रूप से झुलसे मोहम्मद यूसुफ और गौर मंडल को नेशनल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां दोनों की हालत नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक दोनों को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है।
शॉर्ट सर्किट से लगी आग
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मंगलवार दोपहर बैग निर्माण इकाई में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी। आग तेजी से पूरी फैक्ट्री में फैल गई। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री में बड़ी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री मौजूद थी, जिससे आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले लिया।
बंद दरवाजे और धुएं ने बढ़ाई मुश्किल
घटना के बाद कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री में काम के दौरान दरवाजे और खिड़कियां बंद रखी जाती थीं। आग लगने के बाद बिजली चली गई, जिससे अंदर घना अंधेरा फैल गया। कुछ ही देर में धुएं ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। कर्मचारियों का कहना है कि अंदर अग्निशामक यंत्र मौजूद थे, लेकिन धुएं और अंधेरे के कारण वे वहां तक पहुंच ही नहीं सके।
असुरक्षित माहौल में कराया जाता था काम
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों के अनुसार फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता था। पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था नहीं थी और मजदूरों को बेहद अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में काम करना पड़ता था। हादसे के बाद इलाके में फैक्ट्री सुरक्षा को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
गौरतलब है कि इसी साल जनवरी में आनंदपुर के नाजिराबाद इलाके में भी भीषण आग लगने की घटना हुई थी। उस हादसे के बाद प्रशासन ने सुरक्षा नियमों को लेकर सख्ती की बात कही थी, लेकिन तिलजला की घटना ने एक बार फिर उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी थी कंपनी
जानकारी के मुताबिक डेल्टा लेदर कॉर्पोरेशन नाम की यह फैक्ट्री अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के लिए उत्पाद तैयार करती थी। यहां बने बैग और अन्य चमड़े के सामान विदेशों तक भेजे जाते थे। अब जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि फैक्ट्री में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।