देश के कई हिस्सों में इन दिनों बारिश, तेज हवाओं, आंधी-तूफान और जलभराव की स्थिति देखने को मिल रही है। मौसम विभाग की ओर से बदलते मौसम को लेकर अलग-अलग रंगों की चेतावनियां जारी की जाती हैं। कई बार मौसम की खबरों में येलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट जैसे शब्द सुनने को मिलते हैं। इन चेतावनियों का उद्देश्य लोगों को संभावित मौसम संबंधी खतरे के प्रति पहले से सतर्क करना होता है। अलग-अलग अलर्ट के जरिए प्रशासन को भी आवश्यक तैयारियां करने का समय मिलता है। खासकर भारी बारिश, तेज हवाओं, गरज-चमक और बाढ़ जैसी परिस्थितियों में इन चेतावनियों की अहम भूमिका होती है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि मौसम विभाग किस परिस्थिति में कौन-सा अलर्ट जारी करता है।
किस आधार पर तय होता है मौसम अलर्ट
मौसम का पूर्वानुमान कई वैज्ञानिक और मौसमी परिस्थितियों के आधार पर तैयार किया जाता है। मौसम विभाग बारिश की संभावित मात्रा, हवा की गति, आंधी-तूफान, गरज-चमक और बिजली गिरने जैसी परिस्थितियों पर नजर रखता है। मौसम तेजी से बदल सकता है, इसलिए कुछ समय पहले जारी किया गया पूर्वानुमान बाद में बदल भी सकता है। इसी वजह से मौसम विभाग समय-समय पर चेतावनियों को अपडेट करता रहता है। रंग आधारित चेतावनियों का मुख्य उद्देश्य आम लोगों के साथ-साथ प्रशासन को भी संभावित खतरे के लिए तैयार करना है। आपदा प्रबंधन एजेंसियां, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ जैसी टीमें भी इन चेतावनियों के आधार पर तैयारी कर सकती हैं। इससे संवेदनशील इलाकों में समय रहते बचाव और राहत की व्यवस्था मजबूत करने में मदद मिलती है।
मौसम पूर्वानुमान के दो प्रमुख प्रकार
मौसम विभाग की ओर से सामान्य तौर पर अलग-अलग अवधि के लिए मौसम संबंधी जानकारी जारी की जाती है। इसमें वर्तमान मौसम की स्थिति और आने वाले दिनों के संभावित मौसम का पूर्वानुमान शामिल होता है। वर्तमान पूर्वानुमान के जरिए किसी विशेष क्षेत्र में तत्काल मौसम की स्थिति और संभावित खतरे की जानकारी दी जाती है। वहीं दूसरे प्रकार के पूर्वानुमान में अगले कुछ दिनों के दौरान बारिश, आंधी या अन्य मौसमी गतिविधियों की संभावना बताई जाती है। जिलों और क्षेत्रों के अनुसार मौसम की स्थिति अलग-अलग हो सकती है। इसलिए एक ही राज्य के अलग-अलग हिस्सों के लिए अलग रंग की चेतावनी जारी की जा सकती है। लोगों को अपने क्षेत्र के लिए जारी ताजा मौसम चेतावनी पर ध्यान देना चाहिए।
65 से 115 मिलीमीटर तक बारिश मानी जाती है भारी
24 घंटे के दौरान यदि किसी क्षेत्र में लगभग 65 से 115 मिलीमीटर तक बारिश दर्ज होती है, तो इसे भारी बारिश की श्रेणी में रखा जाता है। इतनी बारिश होने पर निचले इलाकों में जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है। शहरों में सड़क यातायात प्रभावित होने के साथ-साथ जल निकासी व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है। ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में इसका असर और अधिक गंभीर हो सकता है। लगातार भारी बारिश होने पर नदियों और जलाशयों का जलस्तर भी बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई जाती है। लोगों को भी मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी जा सकती है।
115 से 204 मिलीमीटर बारिश को माना जाता है बहुत भारी
जब 24 घंटे के दौरान बारिश की मात्रा 115 से 204 मिलीमीटर के बीच पहुंचती है, तो इसे बहुत भारी बारिश की श्रेणी में माना जाता है। इस स्तर की बारिश से सामान्य जनजीवन पर व्यापक असर पड़ सकता है। कई इलाकों में सड़कें जलमग्न होने, यातायात बाधित होने और निचले क्षेत्रों में पानी भरने की स्थिति बन सकती है। लगातार बारिश होने पर नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। इससे बाढ़ जैसी परिस्थितियों का खतरा भी बढ़ जाता है। पहाड़ी और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में खतरा और अधिक बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में प्रशासन को राहत और बचाव दलों को सतर्क रखने की जरूरत पड़ती है।
204 मिलीमीटर से अधिक बारिश बेहद गंभीर
यदि 24 घंटे में बारिश की मात्रा 204 मिलीमीटर से अधिक होने का अनुमान हो, तो स्थिति बेहद गंभीर मानी जाती है। इतनी अधिक बारिश कम समय में होने पर जलभराव और बाढ़ का खतरा तेजी से बढ़ सकता है। निचले इलाकों में लोगों के घरों और सड़कों तक पानी पहुंचने की स्थिति बन सकती है। पुल, सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे पर भी अत्यधिक बारिश का दबाव पड़ सकता है। तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ ऐसी बारिश होने पर जोखिम और बढ़ जाता है। प्रशासन को प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव की तैयारियां तेज करनी पड़ सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों में लोगों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करना बेहद जरूरी होता है।
ग्रीन अलर्ट का क्या मतलब है
ग्रीन अलर्ट सामान्य मौसम की स्थिति को दर्शाता है। इसका मतलब होता है कि किसी क्षेत्र में तत्काल गंभीर मौसम संबंधी खतरे की आशंका नहीं है। इस स्थिति में आमतौर पर सामान्य गतिविधियां जारी रह सकती हैं। हालांकि मौसम लगातार बदलता रहता है, इसलिए ग्रीन अलर्ट का मतलब यह नहीं है कि आगे मौसम में बदलाव नहीं होगा। मौसम विभाग परिस्थितियों पर लगातार निगरानी रखता है। यदि बाद में बारिश, तेज हवा या अन्य मौसमी गतिविधियों की संभावना बढ़ती है, तो चेतावनी का स्तर बदला जा सकता है। इसलिए लोगों को समय-समय पर मौसम विभाग की ताजा जानकारी देखते रहना चाहिए।
येलो अलर्ट कब जारी होता है
येलो अलर्ट संभावित खराब मौसम को लेकर सावधानी बरतने का संकेत देता है। भारी बारिश की संभावना होने पर इस तरह की चेतावनी जारी की जा सकती है। इसके साथ कुछ क्षेत्रों में तेज हवाएं, गरज-चमक और बिजली गिरने जैसी मौसमी गतिविधियों की आशंका भी हो सकती है। कई परिस्थितियों में हवा की