कोलकाता/पटना: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Shuvendu Adhikari) की सरकार ने सरकारी खजाने के दुरुपयोग को रोकने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। अब राज्य की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, विशेषकर 'अन्नपूर्णा परियोजना', का लाभ किसे मिलेगा, यह एसआईआर (SIR) और संशोधित मतदाता सूची (Voter List) से तय होगा। दिलचस्प बात यह है कि बिहार में सम्राट चौधरी की सरकार ने भी बंगाल के इसी मॉडल को अपनाने का फैसला किया है।
अवैध नागरिकों और मृतकों की होगी छुट्टी
बंगाल की महिला एवं बाल विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं या जो भारत के नागरिक नहीं हैं, उन्हें अब सरकारी अनुदान नहीं मिलेगा।
अन्नपूर्णा योजना: 1 जून से शुरू होने वाली इस योजना में महिलाओं को प्रतिमाह 3,000 रुपये मिलेंगे।
छंटनी का आधार: SIR प्रक्रिया के तहत लगभग 91 लाख नाम जांच के दायरे में हैं। इनमें से जो लोग मृत हैं या अवैध रूप से लाभ ले रहे थे, उन्हें सूची से बाहर किया जाएगा।
CAA और ट्रिब्यूनल: जिन लोगों ने CAA के तहत आवेदन किया है, उन्हें लाभ मिलता रहेगा। साथ ही, जिनके मामले ट्रिब्यूनल में विचाराधीन हैं, उनके नाम अभी नहीं हटाए जाएंगे।
बिहार में भी 'डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक'
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी बंगाल की राह पर चलते हुए घोषणा की है कि SIR प्रक्रिया में बाहर हुए लोगों को सरकारी योजनाओं और राशन का लाभ नहीं दिया जाएगा। बिहार के खाद्य मंत्री अशोक चौधरी के अनुसार, मतदाता सूची की जांच के बाद अब तक 5 लाख अवैध नाम राशन कार्ड सूची से हटाए जा चुके हैं।
विपक्ष ने उठाए सवाल
सरकार के इस फैसले पर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सवाल उठाया है कि क्या मतदाता सूची में नाम होना ही नागरिकता का एकमात्र आधार है? उन्होंने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने आरोप लगाया है कि यह प्रक्रिया चुनिंदा तरीके से अल्पसंख्यकों के नाम सूची से बाहर करने की एक साजिश है।मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए 'इंडियन एक्सप्रेस' से कहा, "हम पिछली सरकार की किसी योजना को बंद नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन्हें पारदर्शी बना रहे हैं। अवैध और गैर-भारतीय नागरिकों को सरकारी पैसे का लाभ नहीं लेने दिया जाएगा।"