पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार सिर्फ वोटों की लड़ाई नहीं, बल्कि ‘वोट लंच’ भी चर्चा का बड़ा विषय बन गया। भीषण गर्मी और उमस के बीच राजनीतिक दलों ने अपने कार्यकर्ताओं और बूथ एजेंटों को सक्रिय बनाए रखने के लिए खाने के मेन्यू में बड़ा बदलाव किया। इस बार बिरयानी की जगह चिकन-भात, जीरा राइस और मटन के हल्के झोल ने ज्यादा जगह बनाई।
तृणमूल ने हल्के भोजन को दी प्राथमिकता
सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने कुछ जगहों पर बिरयानी जरूर रखी, लेकिन ज्यादातर इलाकों में चिकन और जीरा राइस को प्राथमिकता दी गई। शिवपुर विधानसभा क्षेत्र के एक तृणमूल कार्यकर्ता ने बताया कि गर्मी को देखते हुए हल्का भोजन सबसे बेहतर विकल्प माना गया। देसी मुर्गे की मांग थी, लेकिन बजट के कारण ब्रॉयलर चिकन से ही काम चलाया गया।
बीजेपी ने चिली चिकन से लेकर बिरयानी तक परोसी
बीजेपी ने भी इस बार ‘चिकन पॉलिटिक्स’ में पूरा जोर लगाया। बालीगंज में चिली चिकन के साथ चाइनीज फ्राइड राइस और चिकन बिरयानी का इंतजाम किया गया। हावड़ा के दासनगर में जीरा राइस और चिकन का मेन्यू रखा गया। उत्तर कोलकाता में नानपुरी, छोले की दाल और बूंदी भी परोसी गई।
कांग्रेस के मेन्यू में मटन झोल और रसगुल्ला
कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं के लिए थोड़ा अलग इंतजाम किया। कई जगहों पर खस्सी (बकरे) के मांस का झोल, भात, दाल-सब्जी और रसगुल्ले का पैकेट दिया गया। सुबह के नाश्ते में कचौरी-आलू दम भी रखा गया। भवानीपुर क्षेत्र में बूथ स्तर पर चिकन बिरयानी भी बांटी गई।
सीपीएम ने अंडा-भात छोड़ अपनाया चिकन-भात
सीपीएम ने भी इस बार अपने पारंपरिक अंडा-भात से आगे बढ़ते हुए बड़े स्तर पर चिकन-भात का इंतजाम किया। सुबह के नाश्ते में केक-बिस्कुट और दोपहर में चिकन झोल-भात ने कार्यकर्ताओं को राहत दी। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना था कि यह विलासिता नहीं, बल्कि संघर्ष के बीच ऊर्जा बनाए रखने की जरूरत है।
एसयूसी ने रखा सादा लेकिन अनुशासित भोजन
एसयूसी ने अपेक्षाकृत सादा लेकिन अनुशासित भोजन व्यवस्था बनाए रखी। सुबह बापूजी केक, केला और कहीं-कहीं उबला अंडा दिया गया, जबकि दोपहर में भात-दाल, सब्जी, अंडे का झोल या आलू-भुजिया-रोटी का इंतजाम रहा।
चिकन के बढ़े दाम के बावजूद नहीं रुकी ‘पेट पूजा’
इस बीच ब्रॉयलर चिकन की कीमत भी चुनावी बाजार में बढ़ गई। कुछ दिन पहले तक 230 रुपये किलो बिकने वाला चिकन मतदान के दिन 260 से 270 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया। बावजूद इसके, सभी दलों ने कार्यकर्ताओं की थाली खाली नहीं रहने दी।
अब देखना है किसकी थाली में आएगी जीत
अब देखना दिलचस्प होगा कि बैलेट बॉक्स की इस लड़ाई में जीत किसकी होती है, लेकिन इतना तय है कि इस चुनाव में ‘चिकन पॉलिटिक्स’ ने बिरयानी को पीछे छोड़ दिया।