कोलकाता: पश्चिम बंगाल की नई सरकार राज्य में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी, विश्वसनीय और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए मिशन मोड में आ गई है। शनिवार को शियालदह में आयोजित 'रोजगार मेला' के दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भर्ती परीक्षा प्रणाली (West Bengal Recruitment System) में कई क्रांतिकारी और कड़े बदलावों की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भविष्य में होने वाली सभी सरकारी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को OMR शीट की कार्बन कॉपी देना अनिवार्य किया जाएगा। इसके साथ ही, इंटरव्यू (मौखिक परीक्षा) में मनमाने तरीके से ज्यादा नंबर देने की व्यवस्था पर भी रोक लगाई जाएगी।
"कार्बन कॉपी छिपाने से ही पैदा हुआ भ्रष्टाचार" – मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने प्रशासनिक स्तर पर हुई समीक्षा का जिक्र करते हुए कहा, "पद संभालने के बाद जब मैंने अधिकारियों से पूछा कि परीक्षा कैसे आयोजित की जाती है, तो मुझे बताया गया कि ओएमआर पद्धति तो है, लेकिन परीक्षार्थियों को कार्बन कॉपी नहीं दी जाती। यह व्यवस्था पूरी तरह संदेहास्पद है।"
सीएम ने कड़े शब्दों में कहा:
"जो अभ्यर्थी परीक्षा दे रहा है, उसके पास अपनी उत्तर पुस्तिका की प्रति होनी ही चाहिए। कार्बन कॉपी को अपने पास छिपाकर रखने की इसी पुरानी संस्कृति से भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार का जन्म हुआ है। अब यह खेल नहीं चलेगा।"
इंटरव्यू (Viva) के नंबर कम करने पर जोर
प्रशासनिक गलियारों में यह माना जाता रहा है कि लिखित परीक्षा में पास होने वाले योग्य उम्मीदवारों को इंटरव्यू में कम नंबर देकर बाहर कर दिया जाता था और चहेतों को अतिरिक्त नंबर देकर नौकरी दे दी जाती थी। इस विसंगति को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि सरकार इंटरव्यू के नंबरों का वेटेज (महत्व) कम करने जा रही है। अब लिखित परीक्षा और शैक्षणिक योग्यता (Academic Score) के आधार पर ही मुख्य मेरिट तय होगी ताकि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष रहे।
पूर्ववर्ती टीएमसी सरकार पर तीखा हमला
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस मंच से पूर्व की तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर चौतरफा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि:
पिछली सरकार के कार्यकाल में हुए व्यापक भर्ती घोटालों के कारण देश भर में पश्चिम बंगाल की छवि तार-तार हुई है।
पूर्ववर्ती सरकार ने न केवल केंद्रीय नीतियों की अनदेखी की, बल्कि संविधान की मूल भावना का भी अपमान किया।
मनमाने ढंग से प्रशासन चलाने के कारण ही हजारों योग्य नौकरीपेशा और युवा आज अधर में लटके हैं।
आगामी विधानसभा सत्र में आएगा नया कानून
रोजगार मेले के मंच से मुख्यमंत्री ने एलान किया कि युवाओं के खोए हुए भरोसे को वापस जीतना उनकी सरकार की पहली प्राथमिकता है। इसके लिए एक पारदर्शी और जवाबदेह भर्ती प्रणाली तैयार की जा रही है। इस नई नीति को कानूनी अमलीजामा पहनाने के लिए **विधानसभा के अगले सत्र में ही एक नया विधेयक (Bill) पेश किया जा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ वर्षों से भर्ती घोटाला सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है। ऐसे में नई सरकार द्वारा ओएमआर की कार्बन कॉपी देने और इंटरव्यू का कोटा कम करने का यह दांव सीधे तौर पर नौकरीपेशा युवाओं के असंतोष को शांत करने और राज्य में पारदर्शिता का नया दौर शुरू करने की बड़ी कोशिश है।