सनातन धर्म में ज्येष्ठ मास के मंगलवारों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। इन्हें ‘बड़ा मंगल’ अथवा ‘बुढ़वा मंगल’ के नाम से जाना जाता है। विशेष रूप से उत्तर भारत के अनेक क्षेत्रों में इन दिनों भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना, भंडारे, सुंदरकांड पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन बड़े उत्साह के साथ किया जाता है। मान्यता है कि ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले मंगलवार भगवान हनुमान को अत्यंत प्रिय होते हैं और इस दिन श्रद्धापूर्वक की गई उपासना से भक्तों को विशेष पुण्यफल की प्राप्ति होती है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मास के दौरान कुल आठ बड़े मंगल पड़ रहे हैं, जिनमें चौथा बड़ा मंगल 26 मई को अत्यंत शुभ और दुर्लभ संयोगों के कारण विशेष महत्व प्राप्त कर रहा है।
पद्मिनी एकादशी और बड़े मंगल का दुर्लभ संगम
इस वर्ष चौथे बड़े मंगल के दिन पद्मिनी एकादशी तिथि का प्रभाव भी विद्यमान है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है। वैदिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिकमास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 26 मई की प्रातः आरंभ होकर अगले दिन तक रहेगी। यद्यपि पद्मिनी एकादशी का व्रत उदयातिथि के आधार पर 27 मई को रखा जाएगा, फिर भी 26 मई के पूरे दिन और रात्रि में एकादशी तिथि का प्रभाव बना रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब एकादशी और मंगलवार का ऐसा संयोग बनता है, तब भगवान विष्णु और भगवान हनुमान दोनों की संयुक्त कृपा प्राप्त होती है। इससे साधक को आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलने का विशेष योग बनता है।
सिद्धि योग और रवि योग ने बढ़ाया दिन का महत्व
ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन अत्यंत शुभ माना जा रहा है क्योंकि इस अवसर पर सिद्धि योग और रवि योग जैसे मंगलकारी योगों का निर्माण हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में सिद्धि योग को सफलता, उपलब्धि और कार्यसिद्धि का कारक माना गया है, जबकि रवि योग को अनेक दोषों का नाश करने वाला शुभ योग बताया गया है। मान्यता है कि इन योगों में किए गए धार्मिक कार्य, जप, तप, दान और पूजा विशेष फल प्रदान करते हैं। नए कार्यों की शुरुआत, धार्मिक संकल्प तथा आध्यात्मिक साधना के लिए भी यह समय अत्यंत अनुकूल माना जाता है।
संकटमोचक हनुमान की उपासना का विशेष अवसर
भगवान हनुमान को शक्ति, भक्ति, साहस और समर्पण का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है। वे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के परम भक्त हैं और सनातन परंपरा में संकटमोचक के रूप में पूजित हैं। मान्यता है कि उनके स्मरण मात्र से भय, नकारात्मकता और जीवन की अनेक बाधाएं दूर होने लगती हैं। भक्तों का विश्वास है कि हनुमान जी की कृपा से असंभव प्रतीत होने वाले कार्य भी सहज रूप से पूर्ण हो सकते हैं। ज्येष्ठ मास के बड़े मंगल पर उनकी आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है, इसलिए इस दिन मंदिरों में दर्शन और पूजा के लिए श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उमड़ती है।
रुद्रावतार के रूप में भी पूजित हैं हनुमान जी
धार्मिक ग्रंथों में भगवान हनुमान को भगवान शिव का रुद्रावतार भी माना गया है। माता अंजना और केसरी के पुत्र के रूप में अवतरित हुए हनुमान जी ने अपने जीवन में अद्वितीय पराक्रम, विनम्रता और भक्ति का आदर्श प्रस्तुत किया। रामायण में वर्णित उनके चरित्र ने उन्हें केवल एक वीर योद्धा ही नहीं बल्कि आदर्श सेवक, श्रेष्ठ भक्त और धर्मरक्षक के रूप में स्थापित किया। यही कारण है कि उनके प्रति श्रद्धा केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वभर में करोड़ों श्रद्धालु उन्हें आस्था और विश्वास के प्रतीक के रूप में पूजते हैं।
इस दिन क्यों किया जाता है सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बड़े मंगल पर सुंदरकांड, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और राम नाम का स्मरण विशेष फल प्रदान करता है। कहा जाता है कि इन स्तोत्रों और पाठों के माध्यम से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा मानसिक दृढ़ता बढ़ती है। भक्त इस दिन व्रत रखकर, लाल पुष्प अर्पित कर, सिंदूर चढ़ाकर तथा गरीबों को भोजन और दान देकर पुण्य अर्जित करते हैं। अनेक स्थानों पर विशाल भंडारों और सामूहिक धार्मिक आयोजनों की भी परंपरा देखने को मिलती है।
मनोकामना पूर्ति और कष्टों से मुक्ति का शुभ अवसर
शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार बड़ा मंगल और एकादशी का संयुक्त प्रभाव साधकों के लिए अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है। यह संयोग जीवन की बाधाओं को दूर करने, आर्थिक संकट से राहत पाने, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में मानसिक बल प्राप्त करने तथा आध्यात्मिक उन्नति के लिए अनुकूल माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु और भगवान हनुमान की संयुक्त आराधना कर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। विशेष रूप से अधिकमास में पड़ने वाली पद्मिनी एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
आस्था, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश
चौथा बड़ा मंगल केवल एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा और आध्यात्मिक जागरण का पर्व भी है। पद्मिनी एकादशी, सिद्धि योग और रवि योग जैसे दुर्लभ संयोग इस दिन को और अधिक विशेष बना रहे हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर आत्मचिंतन, भक्ति और सकारात्मक संकल्पों के माध्यम से जीवन को नई दिशा देने का माना जाता है। सनातन परंपरा में ऐसे शुभ अवसर व्यक्ति को धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं तथा ईश्वर के प्रति समर्पण को और अधिक सुदृढ़ बनाते हैं।