नई दिल्ली: हिंदू धर्म में तीज का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। साल में आने वाली प्रमुख तीज में हरियाली तीज, हरतालिका तीज और कजरी तीज का विशेष महत्व है। आमतौर पर सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से तीज का व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित लड़कियां भी मनचाहे और योग्य जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रख सकती हैं।
क्या कुंवारी लड़कियां रख सकती हैं कजरी तीज का व्रत?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुंवारी लड़कियां कजरी तीज का व्रत रख सकती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर योग्य और मनचाहे जीवनसाथी की कामना की जाती है। हालांकि, अविवाहित कन्याओं के लिए निर्जला व्रत रखना अनिवार्य नहीं माना जाता। वे अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार कर सकती हैं या अपने परिवार में चली आ रही परंपरा के मुताबिक व्रत रख सकती हैं।
कब है कजरी तीज 2026?
साल 2026 में कजरी तीज 31 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी। यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।
- तृतीया तिथि शुरू: 30 अगस्त 2026, सुबह 9:36 बजे
- तृतीया तिथि समाप्त: 31 अगस्त 2026, सुबह 8:50 बजे
- कजरी तीज 2026 के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 बजे से 5:37 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:14 बजे से 1:04 बजे तक
- संध्या काल: शाम 6:54 बजे से रात 8:03 बजे तक
कुंवारी लड़कियां कैसे रखें कजरी तीज का व्रत?
अविवाहित लड़कियां अपनी इच्छा, स्वास्थ्य और सामर्थ्य के अनुसार व्रत रख सकती हैं। निर्जला व्रत रखना जरूरी नहीं माना जाता। फलाहार या परिवार की परंपरा के अनुसार व्रत किया जा सकता है।
1. व्रत का संकल्प लें
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती के सामने मनचाहे और योग्य जीवनसाथी की कामना करते हुए व्रत का संकल्प लें।
2. शिव-पार्वती की पूजा करें
माता पार्वती को फूल, फल और सुहाग सामग्री अर्पित करें। भगवान शिव को जल और बेलपत्र चढ़ाकर उनकी आराधना करें।
3. नीमड़ी माता की पूजा
कई क्षेत्रों में कजरी तीज पर शाम के समय भगवान शिव-पार्वती के साथ नीम की टहनी यानी नीमड़ी माता की पूजा करने की परंपरा है।
4. कथा और मंत्र का जाप
दिनभर शिव-पार्वती का ध्यान और पूजा करें। कजरी तीज की कथा सुनें और ‘ॐ गौरी शंकराय नमः’ मंत्र का जाप कर सकती हैं।
5. चंद्रमा को अर्घ्य
कजरी तीज पर चंद्रमा को अर्घ्य देने की भी परंपरा है। चंद्र दर्शन के बाद अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।
कजरी तीज पर सत्तू का क्या महत्व है?
कजरी तीज को कई जगहों पर सातूड़ी तीज भी कहा जाता है। इसी वजह से इस पर्व पर सत्तू का विशेष महत्व माना जाता है। कई स्थानों पर चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद सत्तू खाकर व्रत खोलने की परंपरा है।
ध्यान दें: व्रत और पूजा की विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए अपने घर की परंपरा और स्थानीय मान्यता को प्राथमिकता देना उचित है।