शारदीय नवरात्रि हिंदू कैलेंडर के सातवें माह आश्विन में आती है। आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होकर महानवमी तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। ज्योतिषाचार्य चंद्रकांत सारस्वत के अनुसार इस साल शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्टूबर दिन सोमवार से हो रहा है। पंचांग अनुसार आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर को रात 9:19 बजे से प्रारंभ होकर 11 अक्टूबर को रात 9:30 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार नवरात्रि 11 अक्टूबर सोमवार से प्रारंभ होगी और इस दिन से मां दुर्गा की पूजा होगी।
मां दुर्गा का वाहन हाथी क्यों
मां दुर्गा इस बार हाथी पर सवार होकर कैलाश से अपने मायके धरती पर आएंगी। उनके साथ भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय भी आते हैं। माता की सवारी या वाहन दिन के अनुसार तय होता है। जिस दिन से नवरात्रि का प्रारंभ होता है उस दिन के निर्धारित वाहन से मां दुर्गा मायके आती हैं। देवीभागवत पुराण में बताया गया है कि जब नवरात्रि का शुभारंभ रविवार या सोमवार को होता है तो मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर धरती पर आती हैं। इस साल सोमवार से शुरुआत होने के कारण वाहन हाथी निर्धारित है।
हाथी पर आगमन शुभ या अशुभ
जब मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होता है तो वह मातारानी के भक्तों के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में मातारानी की कृपा से शुभता, सुख-समृद्धि में बढ़ोतरी होती है। अच्छी वर्षा होने की भी संभावना रहती है जिससे धरती धन और धान्य से परिपूर्ण हो जाती है। हाथी शक्ति, ऐश्वर्य और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है इसलिए इस वाहन से आगमन को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जाता है। भक्तों के लिए यह नवरात्रि विशेष रूप से लाभकारी हो सकती है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन यानी प्रतिपदा को कलश स्थापना की जाती है। दुर्गा पूजा में कलश पूजन नवरात्रि का बड़ा महत्वपूर्ण चरण है। शास्त्रों के अनुसार यदि आप अपने घर में कलश स्थापना कर रहे हैं तो यह साक्षात् देवी मां का ही स्वरूप है। इसलिए कलश स्थापना के लिए सही मुहूर्त होना बेहद आवश्यक हो जाता है। 11 अक्टूबर को घटस्थापना और कलश पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 6:19 से लेकर 10:12 तक है। अलग-अलग स्थानों पर सूर्योदय के समय में अंतर होने की वजह से इस मुहूर्त का समय आगे या पीछे हो सकता है।
नवरात्रि की अवधि और महत्व
नवरात्रि सामान्यतः नौ दिनों की होती है लेकिन कभी-कभी तिथियों के बढ़ने की वजह से दस दिनों की हो जाती है तो कभी तिथियों के लोप होने से आठ दिनों की भी होती है। इस साल आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से महानवमी तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाएगी। कलश स्थापना के साथ ही मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है ताकि वे नौ दिनों तक घर में वास करें। उनकी कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि और शुभता आने की कामना की जाती है। भक्त इन दिनों में व्रत, पूजा और आरती के साथ माता की आराधना करते हैं।