मुंबई - NEET पेपर लीक मामले और देशभर में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्र सरकार पहले ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून लाने का संकेत दे चुकी है। इसी बीच भारत के पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर प्रतिक्रियादी है। सचिन ने कहा कि छात्रों को कभी ऐसा महसूस नहीं होना चाहिए कि उनकी कड़ी मेहनत बेकार जा रही है। मेरे पिता प्रोफेसर थे।
भारत के महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने देशभर में जारी छात्र आंदोलन और परीक्षा प्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने छात्रों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि किसी भी छात्र को कभी यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उसकी कड़ी मेहनत बेकार चली गई। सचिन का यह बयान ऐसे समय आया है, जब NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी हैं।

पिता की सीख को किया याद
सचिन तेंदुलकर ने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि उनके पिता एक प्रोफेसर थे और जीवनभर छात्रों का मार्गदर्शन करते रहे। उन्होंने बताया कि बचपन से ही उन्हें ईमानदारी और मेहनत का महत्व सिखाया गया था। सचिन ने कहा, "मेरे पिता प्रोफेसर थे। वे युवा छात्रों के सलाहकार भी थे और उनका मार्गदर्शन करते थे। उन्होंने मुझे हमेशा एक बात सिखाई कि असफल हो जाना ठीक है, लेकिन नकल करना कभी स्वीकार्य नहीं हो सकता।"
ईमानदारी और मेहनत का दिया संदेश
पूर्व भारतीय खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर ने कहा कि सफलता पाने का सही रास्ता हमेशा मेहनत और ईमानदारी से होकर गुजरता है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपनी मेहनत पर भरोसा रखें और किसी भी परिस्थिति में गलत रास्ता न अपनाएं। उनके मुताबिक, परीक्षा का उद्देश्य केवल अंक हासिल करना नहीं, बल्कि ज्ञान और चरित्र का निर्माण भी है।
छात्रों का बढ़ाया मनोबल
सचिन तेंदुलकर के इस बयान को छात्र समुदाय के लिए एक प्रेरणादायक संदेश माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेहनत करने वाले विद्यार्थियों का आत्मविश्वास कभी नहीं टूटना चाहिए और व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें हर छात्र को उसकी मेहनत का उचित सम्मान मिले।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ बयान
सचिन तेंदुलकर का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई लोगों ने उनकी बात का समर्थन करते हुए कहा कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और ईमानदारी बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि मेहनती छात्रों के साथ न्याय हो सके। सचिन के संदेश को छात्र आंदोलन के बीच सकारात्मक और प्रेरणादायक माना जा रहा है।