कैलिफ़ोर्निया. अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के अनुसार 14 मई 2026 को दो एस्टेरॉयड पृथ्वी के बेहद करीब से गुजरने वाले हैं। NASA और पृथ्वी के निकट मौजूद खगोलीय पिंडों पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय वेधशालाएं इन दोनों वस्तुओं की लगातार निगरानी कर रही हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा एस्टेरॉयड 2026 JH2 को लेकर हो रही है, जिसका आकार एक बड़े विमान या बहुमंजिला इमारत जितना बताया जा रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह इस महीने पृथ्वी के करीब आने वाली सबसे महत्वपूर्ण अंतरिक्षीय घटनाओं में शामिल है।
वैज्ञानिकों ने टक्कर के खतरे से किया इनकार
हालांकि “करीब से गुजरने” जैसी खबरें अक्सर लोगों में डर पैदा कर देती हैं, लेकिन वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि इन एस्टेरॉयड से पृथ्वी को किसी भी प्रकार का सीधा खतरा नहीं है। NASA की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के आंकड़ों के अनुसार ये दोनों खगोलीय पिंड सुरक्षित दूरी से गुजरेंगे और इनके पृथ्वी से टकराने की कोई संभावना नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरिक्षीय मानकों के हिसाब से यह दूरी भले कम मानी जाती हो, लेकिन वास्तविक रूप से यह पृथ्वी के लिए पूरी तरह सुरक्षित स्थिति है।
हवाई जहाज़ जितना बड़ा बताया जा रहा एस्टेरॉयड
एस्टेरॉयड 2026 JH2 को अपोलो-टाइप नियर-अर्थ एस्टेरॉयड श्रेणी में रखा गया है। इसका अर्थ यह है कि इसकी कक्षा पृथ्वी की कक्षा को काटती है और यही वजह है कि वैज्ञानिक इस पर विशेष नजर बनाए हुए हैं। शुरुआती प्रेक्षणों के अनुसार इसका आकार लगभग 16 मीटर से 35 मीटर के बीच हो सकता है। छोटे अनुमान के हिसाब से यह एक बड़ी बस जितना है, जबकि बड़े अनुमान इसे बहुमंजिला इमारत जितना विशाल बताते हैं। इसकी खोज एरिज़ोना स्थित माउंट लेमन सर्वे समेत कई वेधशालाओं ने मिलकर की थी।
पृथ्वी से कितनी दूरी से गुजरेगा यह पिंड?
NASA के आंकड़ों के अनुसार यह एस्टेरॉयड पृथ्वी से लगभग 90 हजार किलोमीटर की दूरी से गुजरने वाला है। यह दूरी पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की औसत दूरी का लगभग एक-चौथाई मानी जा रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार अंतरिक्षीय दृष्टि से यह बेहद “करीबी फ्लाईबाय” है। यही कारण है कि दुनियाभर के खगोलविद और शौकिया अंतरिक्ष प्रेमी इस घटना को लेकर काफी उत्साहित हैं। यह एस्टेरॉयड पृथ्वी के बाद चंद्रमा के भी करीब से गुजरने वाला है, जिससे इसकी निगरानी और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
आसमान में दिख सकता है दुर्लभ दृश्य
विशेषज्ञों का कहना है कि साफ मौसम और उचित उपकरणों की मदद से कुछ क्षेत्रों में इस एस्टेरॉयड की झलक देखी जा सकती है। हालांकि इसे सामान्य आंखों से देख पाना आसान नहीं होगा, लेकिन शक्तिशाली दूरबीनों और टेलीस्कोप के जरिए खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोग इस दुर्लभ अंतरिक्षीय घटना को देखने का प्रयास कर सकते हैं। वैज्ञानिकों के लिए भी यह घटना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पृथ्वी के करीब आने वाले एस्टेरॉयड की गति, दिशा और संरचना का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।
क्यों महत्वपूर्ण होती है ऐसी अंतरिक्ष निगरानी?
वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी के निकट आने वाले एस्टेरॉयड की लगातार निगरानी भविष्य की सुरक्षा के लिहाज से बेहद आवश्यक है। अधिकांश एस्टेरॉयड सुरक्षित दूरी से गुजर जाते हैं, लेकिन अंतरिक्ष में मौजूद लाखों पिंडों में से कुछ संभावित खतरा भी बन सकते हैं। यही कारण है कि NASA और दुनिया की कई अंतरिक्ष एजेंसियां आधुनिक तकनीक के जरिए ऐसे पिंडों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखती हैं। इस तरह की घटनाएं न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाती हैं, बल्कि पृथ्वी की दीर्घकालिक अंतरिक्ष सुरक्षा रणनीति को भी मजबूत करती हैं।