श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर में महिलाओं के गायब होने को लेकर एक रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार 2019 से अगस्त 2026 तक जम्मू-कश्मीर में 16,397 महिलाएं और लड़कियां गायब हो गईं। इनमें से 14,593 बालिग थीं। 11,338 के बारे में पता चल गया जबकि 3,255 अब भी लापता हैं। इसी अवधि में 1,804 नाबालिग लड़कियां गायब हुईं जिनमें से 788 का पता चल सका और 1,016 अभी भी लापता हैं। ये आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं।
आरटीआई से मिला जिलावार डेटा
एक आरटीआई आवेदन के बाद जम्मू-कश्मीर के गृह विभाग ने जिलावार डेटा उपलब्ध कराया। इसमें बताया गया कि 16,397 में से 12,126 महिलाओं का पता चल गया जबकि लगभग 26 प्रतिशत मामले नहीं सुलझ पाए। 2019 में 1,388 महिलाएं गायब हुईं। 2021 में यह संख्या 1,854 और 2022 में 1,398 रही। नाबालिग लड़कियों के मामले में 2019 में 150, 2020 में 221 और 2022 में 249 लड़कियां गायब हुईं। आंकड़े साल दर साल चिंता बढ़ाते रहे हैं।
2025 में सबसे ज्यादा महिलाएं लापता
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 2025 में सबसे ज्यादा 2,595 महिलाएं गायब हुईं। इनमें से 2,102 के बारे में अभी तक पता नहीं चल पाया। 2023 में 2,242 महिलाएं गायब हुई थीं जिनमें से 699 का पता नहीं चल सका। 18 साल से कम उम्र की लड़कियां 2025 में 289 गायब हुईं जिनमें से 166 का पता नहीं चल पाया। पिछले सात सालों में गायब हुईं महिलाओं में से बड़ी संख्या का अभी भी पता नहीं चल पाया है। यह स्थिति सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती है।
किडनैपिंग और महिलाओं के खिलाफ अपराध
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के डेटा के अनुसार 2024 में जम्मू-कश्मीर में किडनैपिंग या जबरन उठाकर शादी करने के 1,202 मामले सामने आए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक छेड़छाड़, रेप, घरेलू हिंसा और प्रताड़ना के मामले बड़ी चुनौती बने हुए हैं। 2023 में महिलाओं के खिलाफ अपराध में सात प्रतिशत की कमी आई थी लेकिन गायब होने के मामले लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं। इन अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए सख्त उपायों की जरूरत है।
लापता मामलों की गंभीरता
गायब होने के मामलों में से लगभग 26 प्रतिशत अभी भी अनसुलझे हैं। नाबालिग लड़कियों के लापता होने के आंकड़े विशेष रूप से चिंताजनक हैं क्योंकि इनमें से आधे से ज्यादा का अभी तक पता नहीं चल पाया। परिवारों के लिए यह मानसिक और भावनात्मक संकट का कारण बन रहा है। पुलिस और संबंधित एजेंसियों को इन मामलों की जांच तेज करनी होगी। समय रहते खोजबीन से कई मामलों को सुलझाया जा सकता है। जागरूकता और सतर्कता भी जरूरी है।
आगे की कार्रवाई और चुनौतियां
जम्मू-कश्मीर प्रशासन को इन आंकड़ों को गंभीरता से लेते हुए प्रभावी रणनीति बनानी होगी। लापता महिलाओं और लड़कियों की खोज के लिए समर्पित टीमें और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानूनी प्रावधानों को सख्ती से लागू करना होगा। समाज और परिवारों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। इन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने से ही स्थिति में सुधार संभव है। पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।