लेह. लद्दाख में प्रयोगात्मक केसर खेती परियोजना ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। लेह में हाल ही में बहाल की गई बंजर भूमि पर लगाए गए केसर के पौधों में सामान्य दो महीने के बजाय महज 30 दिन में पहली बार फूल खिल गए। लेफ्टिनेंट गवर्नर वीके सक्सेना ने रविवार को इस प्रयोगात्मक खेत का निरीक्षण किया और पहली फसल को देखा। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर गर्व के साथ इस उपलब्धि की घोषणा की। यह प्रयोग लद्दाख की कठोर जलवायु में केसर उत्पादन की संभावनाओं को मजबूत करता है।
चार दिन में 22 ग्राम पैदावार
परियोजना से मिली जानकारी के अनुसार पहले चार दिनों में ही करीब 22 ग्राम केसर की पैदावार हो चुकी है। खेत में रोजाना औसतन 20 से 25 फूल खिल रहे हैं। सोमवार सुबह अकेले 72 फूल खिले। यह आंकड़ा प्रयोग की सफलता को दर्शाता है। कम समय में फूल आने और अच्छी पैदावार होने से स्थानीय किसानों और प्रशासन में उत्साह बढ़ा है। केसर की खेती को लद्दाख में नई नकदी फसल के रूप में विकसित करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।
बंजर भूमि पर सफल प्रयोग
यह प्रयोग हाल ही में बहाल की गई बंजर भूमि पर किया गया। लद्दाख प्रशासन ने क्षरित भूमि को फिर से उपजाऊ बनाने के बाद केसर की खेती शुरू की। कठोर जलवायु और ऊंचाई वाले क्षेत्र में इतनी जल्दी फूल आना वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों के लिए भी सुखद आश्चर्य है। सामान्यतः केसर को पहली फसल के लिए दो महीने का समय लगता है लेकिन यहां 30 दिन में ही सफलता मिल गई। यह मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।
लेफ्टिनेंट गवर्नर का निरीक्षण
लेफ्टिनेंट गवर्नर वीके सक्सेना ने स्वयं खेत का दौरा कर पहली फसल को देखा। उन्होंने कहा कि बहाल बंजर भूमि पर केसर का इतनी जल्दी खिलना गर्व की बात है। सामान्य समय सीमा से काफी पहले फूल आने से परियोजना की सफलता साबित होती है। प्रशासन इस प्रयोग को आगे बढ़ाने और किसानों तक इसकी तकनीक पहुंचाने की योजना बना रहा है। निरीक्षण के दौरान खेत की स्थिति और फूलों की गुणवत्ता दोनों संतोषजनक पाई गई।
केसर उत्पादन की नई संभावनाएं
लद्दाख में केसर की सफल खेती क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए नई संभावनाएं खोल सकती है। केसर उच्च मूल्य वाली फसल है और इसकी मांग घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में बनी रहती है। कम समय में फसल तैयार होने से लागत कम और लाभ ज्यादा होने की उम्मीद है। प्रशासन तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण के जरिए किसानों को इस दिशा में प्रोत्साहित करने की तैयारी में है। बंजर भूमि के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण भी जुड़ेगा।
आगे की योजना और विस्तार
इस सफल प्रयोग के बाद परियोजना को विस्तार देने की योजना बनाई जा रही है। अधिक क्षेत्र में केसर लगाने और स्थानीय किसानों को जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। जलवायु अनुकूल किस्मों और खेती की तकनीकों को और बेहतर बनाने के प्रयास जारी रहेंगे। लद्दाख प्रशासन का लक्ष्य क्षेत्र को केसर उत्पादन का नया केंद्र बनाना है। पहली सफलता से उत्साह बढ़ा है और आने वाले मौसम में और बेहतर परिणाम की उम्मीद है। यह प्रयोग आत्मनिर्भरता और नवाचार दोनों को दर्शाता है।