उत्तर कोरिया में लगातार गिरती जन्मदर और बढ़ती उम्रदराज आबादी अब सरकार के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। इसी पृष्ठभूमि में किम जोंग उन सरकार ने दफ्तरों में कार्यरत कर्मचारियों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने का फैसला लिया है। नए नियमों के तहत अब पुरुष कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 63 वर्ष और महिला कर्मचारियों की 58 वर्ष निर्धारित की गई है। इससे पहले पुरुष 60 वर्ष और महिलाएं 55 वर्ष की उम्र में रिटायर होती थीं। यह बदलाव संशोधित श्रम कानून के तहत लागू किया गया है।
सिर्फ कार्यालय कर्मचारियों पर लागू होगा नया नियम
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नई व्यवस्था केवल प्रशासनिक और कार्यालयी कार्यों से जुड़े कर्मचारियों पर लागू होगी। खेतों में काम करने वाले मजदूरों और किसानों की सेवानिवृत्ति आयु में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया अब अनुभवी और प्रशिक्षित कर्मचारियों को लंबे समय तक कार्यबल में बनाए रखना चाहता है ताकि श्रमबल की कमी से निपटा जा सके।
बुजुर्ग आबादी तेजी से बढ़ाने लगी चिंता
उत्तर कोरिया से जुड़े एक शैक्षणिक शोधपत्र में कहा गया है कि देश में जीवन प्रत्याशा बढ़ने के कारण बुजुर्गों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2024 तक देश की कुल आबादी लगभग 2 करोड़ 58 लाख बताई गई है, जिसमें 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों की हिस्सेदारी 11 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। जनसंख्या विशेषज्ञ इसे “बुजुर्ग समाज” की श्रेणी में आने का संकेत मान रहे हैं। सरकार को आशंका है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में श्रमिकों की भारी कमी पैदा हो सकती है।
जन्मदर में गिरावट बनी सबसे बड़ी परेशानी
उत्तर कोरिया में कुल प्रजनन दर घटकर 1.60 तक पहुंच गई है, जबकि किसी देश की आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए यह दर कम से कम 2.1 मानी जाती है। लगातार कम होते जन्मदर के आंकड़ों ने सरकार की चिंता और बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि यही वजह है कि सरकार अब जनसंख्या संतुलन बनाए रखने के लिए सामाजिक और आर्थिक नीतियों में बदलाव कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में उत्तर कोरिया को कार्यशील आबादी की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
संविधान और श्रम कानूनों में भी किए गए बदलाव
हाल के वर्षों में उत्तर कोरिया ने अपने संविधान और श्रम कानूनों में कई संशोधन किए हैं। सरकार ने न्यूनतम कामकाजी आयु 16 से बढ़ाकर 17 वर्ष कर दी है। इसके अलावा मतदान और चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु भी 18 वर्ष निर्धारित की गई है। इन बदलावों को देश की बदलती सामाजिक परिस्थितियों और श्रमबल को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर कोरिया अब आर्थिक और जनसंख्या संकट से निपटने के लिए नई नीतियों पर तेजी से काम कर रहा है।