रविवार को उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते मुंबई स्थित अपने आवास पर सुमन कल्याणपुर का निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही संगीत और फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई। महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार सहित अनेक हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। 1 जून 2026 को मुंबई के पवन हंस श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाना है।
सात सौ चालीस से अधिक गीतों की अमूल्य विरासत
सुमन कल्याणपुर ने अपने लंबे और सफल संगीत सफर में 740 से अधिक गीतों को अपनी आवाज़ दी। हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में उन्होंने अनेक यादगार गीत गाकर अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी गायकी में मिठास, संवेदनशीलता और सहज अभिव्यक्ति का ऐसा संगम था जिसने उन्हें अपने दौर की सबसे सम्मानित गायिकाओं में शामिल कर दिया।
मोहम्मद रफ़ी के साथ बनाई यादगार जोड़ी
भारतीय फिल्म संगीत में मोहम्मद रफ़ी और सुमन कल्याणपुर की जोड़ी को बेहद पसंद किया गया। दोनों ने साथ मिलकर 140 से अधिक युगल गीत गाए, जिनमें से कई आज भी सदाबहार माने जाते हैं। साठ और सत्तर के दशक में इस जोड़ी ने श्रोताओं को अनगिनत ऐसे गीत दिए जो आज भी रेडियो, मंचों और संगीत प्रेमियों की प्लेलिस्ट का हिस्सा बने हुए हैं।
लता मंगेशकर से तुलना ने बढ़ाई चर्चा
सुमन कल्याणपुर की आवाज़ की तुलना अक्सर स्वर कोकिला लता मंगेशकर से की जाती थी। उनकी आवाज़ में इतनी समानता महसूस की जाती थी कि कई बार श्रोता दोनों के गीतों में अंतर नहीं कर पाते थे। हालांकि सुमन कल्याणपुर ने हमेशा इस तुलना को विनम्रता के साथ खारिज किया और लता मंगेशकर को अपनी करीबी मित्र बताया।
दोस्ती और सम्मान का अनोखा रिश्ता
वर्ष 2022 में दिए एक साक्षात्कार में सुमन कल्याणपुर ने कहा था कि जब भी उनकी मुलाकात लता मंगेशकर से होती थी, तो ऐसा लगता था जैसे किसी करीबी मित्र से मिल रही हों। उन्होंने बताया था कि दोनों ने फिल्म ‘चांद’ के लिए एक युगल गीत भी रिकॉर्ड किया था। उनके शब्दों में लता मंगेशकर केवल एक महान गायिका ही नहीं, बल्कि एक आत्मीय मित्र भी थीं।
अनेक भाषाओं में बिखेरा गायकी का जादू
सुमन कल्याणपुर ने केवल हिंदी फिल्मों तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने मराठी, बंगाली, कन्नड़, असमिया और उड़िया सहित कई भारतीय भाषाओं में गीत गाए। फिल्मी गीतों के अलावा उन्होंने भक्ति संगीत, ग़ज़ल और ठुमरी जैसी विधाओं में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उनकी बहुआयामी गायकी ने उन्हें भारतीय संगीत जगत की एक विशिष्ट पहचान प्रदान की।
सदाबहार गीतों के साथ रहेंगी अमर
‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’, ‘ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे’ और ‘तुमने पुकारा और हम चले आए’ जैसे गीतों ने उन्हें अमर बना दिया। उनकी आवाज़ भारतीय संगीत की उस विरासत का हिस्सा है जो समय के साथ और अधिक मूल्यवान होती जाती है। उनके निधन से संगीत जगत ने एक अनमोल रत्न खो दिया है, लेकिन उनके गीत आने वाली पीढ़ियों को भी सुरों की मिठास का एहसास कराते रहेंगे।