लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक परंपरा और ज्ञान विरासत का प्रतिनिधि प्रदेश है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पर्यटन विकास को केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित न रखते हुए इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण, स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और वैश्विक पहचान से जोड़कर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
पर्यटन विभाग की समीक्षा बैठक में सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को गति देने में पर्यटन की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, पारंपरिक कला, खानपान और सेवा क्षेत्र को बड़े स्तर पर अवसर मिलेंगे, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों अर्थव्यवस्थाएं मजबूत होंगी।
ज्ञान भारतम् मिशन पर जोर
मुख्यमंत्री ने ज्ञान भारतम् मिशन की समीक्षा करते हुए कहा कि भारत की प्राचीन पांडुलिपियां हमारी सभ्यता और वैज्ञानिक सोच की अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण और डिजिटलीकरण से आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से जुड़ेंगी। बैठक में 13 लाख से अधिक पांडुलिपियों के सर्वेक्षण और डिजिटलीकरण की प्रगति की जानकारी दी गई।
नए पर्यटन सर्किट और अनुभव आधारित टूरिज्म
बैठक में नीम करोली बाबा सर्किट और बुंदेलखंड फोर्ट सर्किट जैसे नए पर्यटन क्षेत्रों के विकास पर चर्चा हुई। साथ ही कृषि पर्यटन, वाइनयार्ड पर्यटन और विरासत अनुभव केंद्र जैसी नई अवधारणाओं को बढ़ावा देने पर भी विचार किया गया, ताकि निवेश और पर्यटकों दोनों को आकर्षित किया जा सके।
शौर्य संग्रहालय और सांस्कृतिक परियोजनाएं
सीएम ने लखनऊ में नौसेना शौर्य वाटिका और आईएनएस गोमती शौर्य संग्रहालय की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह परियोजना युवाओं में देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्र सेवा की भावना को मजबूत करेगी। संग्रहालय में आधुनिक तकनीक के जरिए नौसेना के गौरवशाली इतिहास को प्रदर्शित किया जाएगा।
नैमिषारण्य और शक्तिपीठों का विकास
मुख्यमंत्री ने नैमिषारण्य को वैदिक ज्ञान और आध्यात्मिक विरासत का केंद्र बताते हुए इसके समग्र विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यहां वेद विज्ञान केंद्र, वैदिक थीम पार्क और तीर्थयात्री सुविधाओं का विकास मिशन मोड में किया जाए। साथ ही विंध्याचल और चित्रकूट जैसे धार्मिक स्थलों के विकास की योजनाओं की भी समीक्षा की गई।
सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण पर जोर
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने निर्देश दिए कि विकास कार्यों के साथ धरोहरों के मूल स्वरूप और ऐतिहासिक पहचान को भी संरक्षित रखा जाए।