जौनपुर: उत्तर प्रदेश के जौनपुर में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की तैयारियों के बीच उपहार सामग्री की खरीद को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जिले में 1922 जोड़ों का विवाह कराने की तैयारी चल रही है, लेकिन नवविवाहित जोड़ों को दिए जाने वाले उपहारों की खरीद के लिए जारी 4.03 करोड़ रुपये का टेंडर सवालों के घेरे में आ गया है। टेंडर हासिल करने वाली लखनऊ की फर्म मेसर्स मुकेश कॉरपोरेशन पर कथित तौर पर फर्जी आईएसओ प्रमाण पत्र और कूटरचित अनुभव प्रमाण पत्र जमा करने का आरोप लगा है। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने संबंधित फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही टेंडर में शामिल चार अन्य कंपनियों के दस्तावेजों की भी जांच कराई जा रही है। अब प्रशासन के सामने नई संस्था का चयन करने और तय समय पर उपहार सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करने की चुनौती है।
4.03 करोड़ के टेंडर में कैसे सामने आई दस्तावेजों की गड़बड़ी?
जौनपुर में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत शादी करने वाले जोड़ों को उपहार सामग्री उपलब्ध कराने के लिए 4.03 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया था। इस टेंडर की जिम्मेदारी लखनऊ की फर्म मेसर्स मुकेश कॉरपोरेशन को मिली थी। हालांकि, टेंडर प्रक्रिया में फर्म की ओर से जमा किए गए दस्तावेजों को लेकर सवाल उठने लगे। आरोप है कि कंपनी ने टेंडर हासिल करने के लिए फर्जी आईएसओ प्रमाण पत्र और कूटरचित अनुभव प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया। मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब बांदा में फर्म के अनुभव प्रमाण पत्र का सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं मिले। इसके बाद दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर संदेह गहराने लगा। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और संबंधित फर्म के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
लखनऊ की फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी
टेंडर में कथित अनियमितता सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने मेसर्स मुकेश कॉरपोरेशन के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रशासन की ओर से फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) नरेंद्र बहादुर सिंह के मुताबिक, मामले को गंभीरता से लेते हुए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। फर्म की ओर से जमा किए गए प्रमाण पत्रों की जांच कराई जा रही है, ताकि उनकी वास्तविकता का पता लगाया जा सके। प्रशासन केवल टेंडर हासिल करने वाली कंपनी तक ही जांच सीमित नहीं रख रहा है। इस प्रक्रिया में शामिल चार अन्य कंपनियों के दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं। सभी कंपनियों के अनुभव प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी अभिलेखों का सत्यापन कराया जा रहा है। जांच में किसी भी तरह की गड़बड़ी मिलने पर संबंधित फर्म के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
अब दूसरी संस्था को मिल सकती है उपहार सामग्री की जिम्मेदारी
टेंडर विवाद सामने आने के बाद अब उपहार सामग्री की खरीद और आपूर्ति के लिए दूसरी संस्था का चयन करना पड़ सकता है। इसके लिए प्रशासन टेंडर प्रक्रिया में शामिल अन्य कंपनियों के दस्तावेजों की जांच करा रहा है। संबंधित फर्मों के अनुभव प्रमाण पत्र, आईएसओ प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी कागजात का सत्यापन किया जा रहा है। प्रशासन की कोशिश है कि नई संस्था का चयन पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाए। जांच पूरी होने के बाद पात्र संस्था को उपहार सामग्री उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। हालांकि, नई संस्था के चयन में लगने वाला समय भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगा। इसकी वजह यह है कि सामूहिक विवाह कार्यक्रमों की तैयारियां पहले से चल रही हैं। ऐसे में खरीद प्रक्रिया को जल्द पूरा करना जरूरी है, ताकि विवाह कार्यक्रमों के दौरान जोड़ों को उपहार देने में किसी तरह की परेशानी न हो।
जौनपुर में 1922 जोड़ों के विवाह की तैयारी
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत जौनपुर जिले में कुल 1922 जोड़ों का विवाह कराने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए जिले में अलग-अलग स्थानों पर सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित करने की रूपरेखा तैयार की गई है। योजना के तहत बदलापुर महोत्सव, जौनपुर महोत्सव और शाहगंज महोत्सव में विवाह समारोह आयोजित करने की तैयारी है। इसके अलावा मड़ियाहूं में भी सामूहिक विवाह कार्यक्रम कराने की योजना बनाई गई है। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में जोड़े एक साथ विवाह बंधन में बंधेंगे। कार्यक्रमों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। विवाह समारोह में शामिल होने वाले जोड़ों के लिए जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसी बीच उपहार सामग्री की खरीद से जुड़ा टेंडर विवाद सामने आने से तैयारियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।
समय पर उपहार सामग्री पहुंचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत शादी करने वाले जोड़ों को सरकार की ओर से उपहार सामग्री उपलब्ध कराई जानी है। इसके लिए खरीदारी से लेकर सामग्री की आपूर्ति तक की प्रक्रिया निर्धारित समय में पूरी करना जरूरी है। लेकिन 4.03 करोड़ रुपये के टेंडर पर विवाद होने के बाद अब पूरी प्रक्रिया नए सिरे से प्रभावित हो सकती है। प्रशासन को पहले संबंधित कंपनियों के दस्तावेजों का सत्यापन कराना होगा और उसके बाद पात्र संस्था का चयन करना होगा। नई संस्था को जिम्मेदारी मिलने के बाद उपहार सामग्री की खरीद और आपूर्ति भी समय पर सुनिश्चित करनी होगी। दूसरी ओर, जिले में 1922 जोड़ों के विवाह कार्यक्रमों की तैयारियां भी जारी हैं। ऐसे में किसी भी तरह की देरी से कार्यक्रमों के दौरान उपहार वितरण की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। फिलहाल प्रशासन के सामने जांच पूरी करने के साथ-साथ विवाह समारोहों के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं समय पर तैयार करने की चुनौती है।
जांच रिपोर्ट शासन को भेजने की तैयारी
मुख्य विकास अधिकारी नरेंद्र बहादुर सिंह के अनुसार, मामले से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन कराया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके। वहीं, उपहार सामग्री की आपूर्ति के लिए पात्र संस्था का चयन भी जांच के आधार पर किया जाएगा। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि नई संस्था को जिम्मेदारी सौंपने से पहले उसके सभी जरूरी दस्तावेजों की जांच हो जाए। इससे खरीद प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता की आशंका को दूर किया जा सकेगा। फिलहाल मेसर्स मुकेश कॉरपोरेशन को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया और अन्य चार कंपनियों के दस्तावेजों का सत्यापन जारी है। अब सबकी नजर जांच के नतीजों और नई संस्था के चयन पर है। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि 1922 जोड़ों के विवाह कार्यक्रमों के लिए उपहार सामग्री की आपूर्ति किस तरह और कितने समय में सुनिश्चित की जाएगी।