लखनऊ - देश में एलपीजी की सप्लाई व्यवस्था को मजबूत करने और सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने करीब 7,000 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश से लगभग 1,800 किलोमीटर लंबी नई LPG पाइपलाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इस विस्तार का सीधा फायदा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत छह राज्यों को मिलने की उम्मीद है।
6 राज्यों में बिछेगी नई LPG पाइपलाइन
PNGRB के मुताबिक, तीन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण LPG पाइपलाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनका नेटवर्क तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक और गोवा तक फैलेगा। इन परियोजनाओं को सरकारी कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड विकसित करेगी। नई पाइपलाइनें एलपीजी के परिवहन के लिए एक मजबूत और अधिक व्यवस्थित नेटवर्क तैयार करने में मदद करेंगी। इससे अलग-अलग क्षेत्रों तक ईंधन की आपूर्ति को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
7,700 से बढ़कर 9,500 किलोमीटर होगा नेटवर्क
इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद PNGRB द्वारा अधिकृत कॉमन-कैरियर LPG पाइपलाइन नेटवर्क में बड़ा विस्तार होगा। वर्तमान में यह नेटवर्क करीब 7,700 किलोमीटर लंबा है, जो नई परियोजनाओं के बाद बढ़कर लगभग 9,500 किलोमीटर हो जाएगा। इस तरह देश के कॉमन-कैरियर LPG पाइपलाइन नेटवर्क में करीब 23.5 प्रतिशत की वृद्धि होगी। करीब 1,800 किलोमीटर के अतिरिक्त नेटवर्क से LPG की आवाजाही के लिए एक वैकल्पिक और अधिक भरोसेमंद परिवहन व्यवस्था विकसित हो सकेगी।
सड़क परिवहन पर कम होगी निर्भरता
इस परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य LPG की ढुलाई में सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करना है। फिलहाल देश के कई हिस्सों में LPG को बड़ी मात्रा में सड़क मार्ग से पहुंचाया जाता है। पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार से लंबी दूरी तक LPG के परिवहन को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा। इससे ईंधन आपूर्ति में संभावित व्यवधानों से निपटने में भी मदद मिल सकती है। पाइपलाइन आधारित परिवहन को अधिक निरंतर और लचीली सप्लाई व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है।
LPG सप्लाई सिस्टम को मिलेगा मजबूती
PNGRB का मानना है कि इन परियोजनाओं से देश की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था अधिक मजबूत और लचीली बनेगी। नए नेटवर्क के जरिए LPG को उत्पादन और भंडारण केंद्रों से अलग-अलग मांग वाले क्षेत्रों तक पहुंचाने में सुविधा होगी। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे बड़े राज्यों में बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए यह नेटवर्क महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। छह राज्यों को जोड़ने वाली ये परियोजनाएं देश में LPG के बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम हैं।
कुल मिलाकर, करीब ₹7,000 करोड़ के निवेश और 1,800 किलोमीटर नई पाइपलाइन के जरिए देश का LPG नेटवर्क लगभग एक-चौथाई बढ़ने जा रहा है। इससे भविष्य में LPG की आपूर्ति को अधिक सुरक्षित, कुशल और लचीला बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।