दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाया है। एक अक्टूबर से एनसीआर के सभी 1,041 पेट्रोल पंपों पर यह नियम लागू होगा कि किसी भी वाहन को बिना वैध PUC (Pollution Under Control) सर्टिफिकेट के पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा। इसका उद्देश्य वाहनों से निकलने वाले धुएं और प्रदूषण पर सीधा नियंत्रण लगाना है ताकि राजधानी क्षेत्र की हवा की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके।
वायु प्रदूषण 30–35% कम करने का लक्ष्य
मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस वर्ष एनसीआर में वायु प्रदूषण को 30 से 35 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य तय किया गया है। सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मिलकर काम करें और तय समय सीमा में प्रदूषण नियंत्रण उपायों को जमीन पर लागू करें ताकि वास्तविक सुधार दिख सके।
डिजिटल सिस्टम से होगी सख्त मॉनिटरिंग
प्रदूषण पर नजर रखने के लिए सरकार ने डिजिटल निगरानी सिस्टम को मजबूत करने का फैसला किया है। इसके तहत पोर्टल, मोबाइल एप, जीपीएस ट्रैकिंग और डैशबोर्ड आधारित सिस्टम तैयार किया जा रहा है। इससे उद्योगों, वाहनों और निर्माण गतिविधियों की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी ताकि नियमों का उल्लंघन तुरंत पकड़ा जा सके।
उद्योगों और निर्माण कार्यों पर कड़ी निगरानी
एनसीआर में 725 प्रदूषणकारी उद्योगों की पहचान की गई है, जिनमें से अधिकतर में ऑनलाइन उत्सर्जन मॉनिटरिंग सिस्टम लगा दिया गया है। निर्माण स्थलों पर जियो-टैगिंग और जीपीएस ट्रैकिंग लागू की जा रही है ताकि धूल और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाई जा सके।
सड़क सफाई और धूल नियंत्रण पर फोकस
गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ में 1,792 किलोमीटर सड़कों के पुनर्विकास की योजना बनाई गई है। इसके अलावा मशीनों से सड़क सफाई को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि धूल के कणों को कम किया जा सके। फिलहाल मशीनों की संख्या कम है, लेकिन नई मशीनों की खरीद प्रक्रिया जारी है।
कचरा प्रबंधन और हरियाली बढ़ाने की योजना
निर्माण कचरे के बेहतर प्रबंधन के लिए सेकेंडरी कलेक्शन सेंटर बनाए जा रहे हैं। साथ ही बड़े स्तर पर पौधारोपण, पराली प्रबंधन, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और ईवी चार्जिंग स्टेशन बढ़ाने की योजना पर काम चल रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि हर स्तर पर पर्यावरण संतुलन को मजबूत किया जाए।