अयोध्या अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी और चोरी के आरोप सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन ने दान प्रबंधन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब मंदिर में आने वाले चढ़ावे की राशि की रोजाना गिनती की जा रही है और उसी दिन बैंक में जमा कराया जा रहा है। इस बीच पूरे मामले की जांच कर रही एसआईटी लगातार रिकॉर्ड खंगाल रही है। वहीं 19 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे की संभावना ने इस पूरे मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया है।
रोजाना 18 से 20 लाख रुपये पहुंच रहा चढ़ावा
रामलला के दर्शन के लिए देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही मंदिर में चढ़ावे की राशि भी लगातार बढ़ रही है। सूत्रों के अनुसार वर्तमान समय में प्रतिदिन करीब 18 से 20 लाख रुपये नकद चढ़ावे के रूप में प्राप्त हो रहे हैं। मंदिर परिसर में निर्धारित स्थान पर प्रतिदिन दान पेटियों से राशि निकालकर उसकी गणना की जा रही है और इसके बाद रकम को भारतीय स्टेट बैंक की निर्धारित शाखा में जमा कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पिछले 10 दिनों में लगभग दो करोड़ रुपये बैंक में जमा कराए गए हैं।
चोरी के आरोपों के बाद बदली गई व्यवस्था
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद दान प्रबंधन व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे थे। इसके बाद प्रशासन ने चढ़ावे की गिनती और जमा प्रक्रिया को और अधिक सख्त बना दिया है। पहले दान राशि की गणना सप्ताह में एक बार की जाती थी, लेकिन श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और चढ़ावे में वृद्धि के बाद इसे नियमित कर दिया गया। अब हर दिन दान पेटियों की राशि गिनी जा रही है और रिकॉर्ड तैयार कर बैंक में जमा कराया जा रहा है।
गिनती में बैंक कर्मचारियों की अहम भूमिका
जानकारी के अनुसार वर्तमान में चढ़ावे की गणना का कार्य मुख्य रूप से बैंक कर्मचारियों की निगरानी में किया जा रहा है। करीब 14 बैंक कर्मचारी इस प्रक्रिया में लगे हुए हैं। पहले इस काम में एक बाहरी एजेंसी के कर्मचारी भी शामिल थे। जिन लोगों के नाम कथित गड़बड़ी और चोरी के आरोपों में सामने आए हैं, उनके इसी व्यवस्था से जुड़े होने की चर्चा है। यही वजह है कि अब पूरी प्रक्रिया पर अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है।
एसआईटी कर रही है पूरे मामले की जांच
चढ़ावा प्रकरण की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) लगातार मामले की पड़ताल कर रहा है। जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं व्यवस्था में ऐसी कोई खामी तो नहीं थी, जिसका फायदा उठाकर वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दिया गया हो। जांच के दौरान मंदिर प्रशासन, संबंधित कर्मचारियों और विभिन्न व्यवस्थाओं से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।
2021 से अब तक का रिकॉर्ड खंगाल रही जांच टीम
एसआईटी ने अपनी जांच का दायरा व्यापक कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक टीम वर्ष 2021 से लेकर वर्तमान समय तक के सभी रिकॉर्ड की जांच कर रही है। मंदिर परिसर, दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा सहयोग, प्रशासनिक समन्वय, अतिथि प्रबंधन और अन्य व्यवस्थाओं में जुड़े लोगों का पूरा ब्योरा जुटाया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि कर्मचारियों और कार्यकर्ताओं की नियुक्ति किस प्रक्रिया के तहत हुई थी और उनकी जवाबदेही किस स्तर पर तय की गई थी।
करीब 150 लोगों की भूमिका की हो रही जांच
सूत्रों के अनुसार राम मंदिर और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं में पिछले कुछ वर्षों के दौरान करीब 150 लोगों को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी बताई जा रही है जो अयोध्या के बाहर से आए और समय के साथ महत्वपूर्ण दायित्वों तक पहुंच गए। एसआईटी इन सभी की भूमिका, जिम्मेदारियों और कार्यप्रणाली का विश्लेषण कर रही है ताकि किसी भी संभावित अनियमितता की परतें खोली जा सकें।
19 जून को अयोध्या आ सकते हैं सीएम योगी
इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 19 जून को अयोध्या पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि वे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के जन्मदिवस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। इस अवसर पर धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन प्रस्तावित है, जिसमें संत समाज और विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख लोग मौजूद रहेंगे।
विकास कार्यों और व्यवस्थाओं की भी हो सकती है समीक्षा
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री अपने संभावित दौरे के दौरान रामनगरी में चल रहे विकास कार्यों, मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की सुविधाओं की समीक्षा भी कर सकते हैं। चढ़ावा विवाद और एसआईटी जांच के बीच यह दौरा प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां मुख्यमंत्री के संभावित कार्यक्रम को लेकर पहले से तैयारियों में जुट गई हैं।
पूरे प्रदेश की नजर जांच रिपोर्ट पर
राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब प्रदेश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो चुका है। श्रद्धालुओं और आम लोगों की नजर एसआईटी की जांच पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में व्यवस्थागत खामियों, जवाबदेही और निगरानी तंत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और उसके निष्कर्ष इस मामले में अहम भूमिका निभाएंगे।