लखनऊ: पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर से आतंकी बने शहजाद भट्टी के कथित नेटवर्क को लेकर उत्तर प्रदेश एटीएस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। शनिवार को एटीएस की टीमों ने प्रदेश के कई जिलों में संदिग्धों के ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। शुरुआती रिपोर्टों में करीब 15 जिलों में कार्रवाई की बात सामने आई थी, जबकि बाद के अपडेट में 10 जिलों में कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि इस दौरान करीब 24 लोगों से पूछताछ की गई। जांच एजेंसी का फोकस नेटवर्क के स्थानीय संपर्कों और उसकी जमीनी गतिविधियों का पता लगाने पर है। इसके साथ ही संदिग्धों के डिजिटल कनेक्शन और आर्थिक लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है। एटीएस यह पता लगाने में जुटी है कि किन लोगों का शहजाद भट्टी के कथित नेटवर्क से वास्तविक और लगातार संपर्क था।
24 लोगों से पूछताछ, 18 को चेतावनी के बाद छोड़ा
ताजा जानकारी के मुताबिक एटीएस ने करीब 24 लोगों को जांच के दायरे में लेकर पूछताछ की। पूछताछ के बाद इनमें से 18 लोगों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है। वहीं, छह अन्य संदिग्धों के मोबाइल फोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच जारी बताई जा रही है।एजेंसी इन गैजेट्स से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संदिग्धों के संपर्क किन लोगों से थे। सोशल मीडिया अकाउंट, चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल गतिविधियों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। एटीएस यह भी देख रही है कि किसी व्यक्ति ने नेटवर्क को स्थानीय स्तर पर लॉजिस्टिक या अन्य तरह की मदद तो नहीं पहुंचाई। अधिकारियों का मकसद महज संपर्क और नेटवर्क की गतिविधियों में वास्तविक भूमिका के बीच अंतर करना है।
पहले गिरफ्तार आरोपियों से मिले इनपुट के बाद बढ़ा जांच का दायरा
बताया जा रहा है कि एटीएस की ताजा कार्रवाई पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों से मिली जानकारी और खुफिया इनपुट के आधार पर आगे बढ़ी है। जांच एजेंसी के सामने 150 से अधिक लोगों की गतिविधियों और संपर्कों से जुड़ी जानकारी आने की बात कही जा रही है।इन्हीं इनपुट के आधार पर संदिग्धों की भूमिका को अलग-अलग स्तर पर जांचा जा रहा है।एटीएस यह पता लगाने में जुटी है कि इनमें से कौन लोग केवल संपर्क में थे और किनकी भूमिका संदिग्ध गतिविधियों में रही। जांच का दायरा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ इंडो-नेपाल सीमा से सटे इलाकों तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। लखनऊ, सीतापुर, बहराइच, श्रावस्ती, अलीगढ़ और मेरठ समेत कई जिलों का नाम कार्रवाई से जोड़ा जा रहा है।आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और लोगों से पूछताछ या कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
चार महीने में 52 संदिग्धों की गिरफ्तारी का दावा
ताजा रिपोर्टों के अनुसार यूपी एटीएस पिछले चार महीनों से शहजाद भट्टी के कथित नेटवर्क को लेकर लगातार कार्रवाई कर रही है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस अवधि में नेटवर्क से जुड़ी कथित आतंकी गतिविधियों के मामलों में 52 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। इन गिरफ्तारियों के बाद हुई पूछताछ से एजेंसी को नेटवर्क की कथित जमीनी कड़ियों के बारे में जानकारी मिलने की बात कही जा रही है।इसी जानकारी के आधार पर अब नए संदिग्धों की भूमिका की जांच की जा रही है। एटीएस का फोकस नेटवर्क के संपर्कों और स्थानीय स्तर पर उसके संभावित सहयोगियों की पहचान पर है।इसके अलावा आर्थिक लेनदेन और डिजिटल गतिविधियों को भी जांच में अहम माना जा रहा है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित नेटवर्क की उत्तर प्रदेश में वास्तविक पहुंच कितनी थी।
शहजाद भट्टी नेटवर्क को लेकर केंद्र ने भी की कार्रवाई
शहजाद भट्टी के कथित नेटवर्क को लेकर केंद्र सरकार की ओर से भी कार्रवाई की गई है।उपलब्ध जानकारी के अनुसार गृह मंत्रालय की अधिसूचना के तहत 16 सितंबर 2026 को नेटवर्क को UAPA के तहत आतंकवादी संगठन की सूची में शामिल किया गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि यह नेटवर्क हथियारों, विस्फोटकों और मादक पदार्थों की तस्करी जैसी गतिविधियों से जुड़ा रहा है। इसके अलावा युवाओं को कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों के लिए प्रभावित करने के आरोपों की भी जांच की जा रही है। इसी नेटवर्क से जुड़े संभावित स्थानीय संपर्कों की पहचान के लिए विभिन्न एजेंसियां इनपुट जुटा रही हैं। उत्तर प्रदेश में एटीएस की कार्रवाई को भी इसी व्यापक जांच का हिस्सा बताया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों और संदिग्धों की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
छह संदिग्धों के गैजेट की जांच पर टिकी नजर
फिलहाल एटीएस की जांच में डिजिटल एविडेंस को बेहद अहम माना जा रहा है। छह संदिग्धों के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच जारी होने की जानकारी सामने आई है।इन गैजेट्स से मिले डेटा के जरिए संदिग्धों के कॉल, चैट और सोशल मीडिया संपर्कों की पड़ताल की जा सकती है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि इन संपर्कों का संबंध शहजाद भट्टी के कथित नेटवर्क से था या नहीं। डिजिटल सुरागों से संभावित आर्थिक लेनदेन और लॉजिस्टिक मदद से जुड़ी जानकारी भी सामने आ सकती है। जांच के दौरान मिले डेटा के आधार पर आगे और लोगों से पूछताछ की जा सकती है। इन डिजिटल सुरागों से यूपी में कथित नेटवर्क की जमीनी पहुंच और उसके संपर्कों को समझने में मदद मिलने की उम्मीद है।
जांच जारी, पूछताछ को अपराध का प्रमाण नहीं माना जा सकता
यूपी एटीएस की यह पूरी कार्रवाई फिलहाल जांच के स्तर पर है। किसी व्यक्ति को पूछताछ के लिए बुलाया जाना या उसके ठिकाने पर जांच होना अपने आप में उसके अपराधी होने का प्रमाण नहीं है। एजेंसी संदिग्धों की भूमिका और उनके कथित संपर्कों की पुष्टि के लिए डिजिटल और अन्य साक्ष्यों को जुटा रही है। जांच के दौरान सामने आने वाले सबूतों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। एटीएस का मुख्य उद्देश्य कथित नेटवर्क की वास्तविक गतिविधियों और उसके स्थानीय संपर्कों की पहचान करना है। फिलहाल छह संदिग्धों के गैजेट से मिलने वाले डिजिटल इनपुट पर विशेष नजर बनी हुई है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस पूरे नेटवर्क को लेकर और जानकारी सामने आने की संभावना है।