उत्तर 24 परगना: पश्चिम बंगाल के ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्र के लिए शुक्रवार, 28 अगस्त 2026, को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई। उत्तर 24 परगना जिले के अशोकनगर स्थित बाईगाछी तेल क्षेत्र से व्यावसायिक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) का उत्पादन और परिवहन शुरू कर दिया गया। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) ने लंबे समय से अटकी इस परियोजना को अब व्यावसायिक चरण में पहुंचाया है। शुक्रवार दोपहर आयोजित कार्यक्रम में ONGC के निदेशक (एक्सप्लोरेशन) ओ. पी. सिन्हा और स्थानीय विधायक सुमित हीरा ने पहले व्यावसायिक कच्चे तेल टैंकर को हरी झंडी दिखाकर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) की हल्दिया रिफाइनरी के लिए रवाना किया।
पहले टैंकर में भेजा गया करीब 12 हजार लीटर कच्चा तेल
व्यावसायिक उत्पादन की शुरुआत के साथ अशोकनगर तेल क्षेत्र से निकाले गए कच्चे तेल की पहली खेप हल्दिया भेजी गई। पहले टैंकर में करीब 12,000 लीटर कच्चा तेल भेजे जाने की जानकारी दी गई है। फिलहाल क्षेत्र में ONGC के दो कुएं उत्पादन में हैं, जिनसे प्रतिदिन करीब 20 घन मीटर यानी लगभग 20,000 लीटर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का उत्पादन हो रहा है। ONGC की योजना आने वाले समय में उत्पादन को और बढ़ाने की है।
5-6 नए कुओं की तैयारी
कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक, बाईगाछी क्षेत्र में 5 से 6 नए कुएं खोदने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इन कुओं के चालू होने के बाद अशोकनगर क्षेत्र से तेल और गैस का उत्पादन मौजूदा स्तर से बढ़ने की उम्मीद है। इस विस्तार के साथ अशोकनगर पश्चिम बंगाल के ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।
‘लाइट क्रूड’ श्रेणी का बताया जा रहा तेल
अशोकनगर से निकलने वाले कच्चे तेल की गुणवत्ता को भी परियोजना की प्रमुख विशेषताओं में गिना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस तेल की API ग्रेविटी करीब 40-41 है। इस आधार पर इसे ‘लाइट क्रूड’ श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे कच्चे तेल को अपेक्षाकृत आसानी से रिफाइन किया जा सकता है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों और विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी गुणवत्ता की तुलना बॉम्बे हाई और WTI जैसे हल्के कच्चे तेलों से की जा रही है। हालांकि, अलग-अलग क्रूड की वास्तविक रिफाइनिंग विशेषताओं की तुलना उनके विस्तृत लैब और रिफाइनरी परीक्षणों के आधार पर ही की जाती है।
2018 में हुई थी बड़ी खोज
अशोकनगर में तेल उत्पादन की कहानी आज से करीब आठ साल पहले शुरू हुई थी। 2018 में ONGC ने अशोकनगर क्षेत्र में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के भंडार की खोज की थी। इसे बंगाल बेसिन में ऊर्जा संसाधनों की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण खोज माना गया। इसके बाद व्यावसायिक उत्पादन की दिशा में काम शुरू किया गया, लेकिन परियोजना को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
2020 में भेजा गया था पहला प्रायोगिक टैंकर
20 दिसंबर 2020 को तत्कालीन केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अशोकनगर का दौरा किया था। उस दौरान क्षेत्र से प्रायोगिक तौर पर कच्चे तेल की पहली खेप टैंकर के जरिए भेजी गई थी। हालांकि, इसके बाद परियोजना की रफ्तार प्रभावित हुई। कोविड-19 महामारी, तकनीकी चुनौतियों और जमीन के लीज एवं कानूनी मामलों से जुड़ी अड़चनों के कारण व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने में समय लगा। बाद में आवश्यक मंजूरियों और भूमि संबंधी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ONGC ने परियोजना पर फिर तेजी से काम शुरू किया।अब यह परियोजना प्रायोगिक चरण से आगे बढ़कर व्यावसायिक उत्पादन के चरण में पहुंच गई है।
राज्य को मिलेगा राजस्व, स्थानीय स्तर पर रोजगार की उम्मीद
अशोकनगर तेल क्षेत्र से व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने का असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने की उम्मीद है। प्रारंभिक अनुमानों के मुताबिक, इस परियोजना से पश्चिम बंगाल सरकार को सालाना करीब ₹104 करोड़ राजस्व और रॉयल्टी प्राप्त हो सकती है। इसके अलावा नई ड्रिलिंग, परिवहन, रखरखाव और सहायक सेवाओं के विस्तार से आसपास के क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है।
ऊर्जा क्षेत्र में पश्चिम बंगाल की भूमिका मजबूत होने की उम्मीद
अशोकनगर से स्थानीय स्तर पर कच्चे तेल का उत्पादन शुरू होना पश्चिम बंगाल के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे राज्य के भीतर तेल एवं गैस संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग का रास्ता मजबूत होगा। हालांकि, मौजूदा उत्पादन स्तर को देखते हुए इसे राज्य की पेट्रोलियम जरूरतों के लिए पूर्ण आत्मनिर्भरता के रूप में देखना उचित नहीं होगा। लेकिन उत्पादन बढ़ने पर यह स्थानीय ऊर्जा आपूर्ति, सरकारी राजस्व और औद्योगिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
बंगाल के ऊर्जा मानचित्र पर अशोकनगर की नई पहचान
2018 की खोज से शुरू हुआ सफर 2020 के प्रायोगिक प्रेषण और कई वर्षों की देरी के बाद अब व्यावसायिक उत्पादन तक पहुंच गया है। यदि प्रस्तावित नए कुएं समय पर उत्पादन में आते हैं, तो अशोकनगर-बाईगाछी क्षेत्र की क्षमता और बढ़ सकती है। ऐसे में उत्तर 24 परगना का यह इलाका आने वाले वर्षों में पश्चिम बंगाल के तेल एवं प्राकृतिक गैस क्षेत्र के महत्वपूर्ण केंद्रों में शामिल हो सकता है।