बांकुड़ा: पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले के सोनामूखी इलाके में दामोदर नदी के किनारे सोमवार शाम एक पुराना मोर्टार शेल मिलने से हड़कंप मच गया। डीहीपाड़ा ग्राम पंचायत के रांगामाटी इलाके में नदी के रेतीले हिस्से में आंशिक रूप से दबे इस बेलनाकार धातु के खोल को स्थानीय लोगों ने देखा, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची सोनामूखी थाने की पुलिस ने एहतियात के तौर पर आसपास का इलाका घेर लिया। लोगों को शेल के पास जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई है। इसे सुरक्षित तरीके से हटाने या निष्क्रिय करने के लिए सेना के बम निरोधक दस्ते को सूचना दिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, शेल के द्वितीय विश्व युद्ध के समय का होने और उसके भीतर विस्फोटक मौजूद होने की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।*
मछुआरों की नजर पड़ी नदी की रेत में दबे शेल पर
स्थानीय लोगों के मुताबिक, सोमवार को कुछ मछुआरे और ग्रामीण दामोदर नदी के किनारे मौजूद थे। इसी दौरान रेत के बीच लोहे का बड़ा बेलनाकार ढांचा दिखाई दिया। करीब से देखने पर यह सैन्य इस्तेमाल में आने वाले मोर्टार शेल जैसा नजर आया। लोगों ने जोखिम उठाने के बजाय तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी। घटना की जानकारी फैलने के बाद आसपास के लोग भी मौके पर पहुंचने लगे। पुलिस ने भीड़ को वहां से हटाया और संदिग्ध विस्फोटक के आसपास सुरक्षा घेरा बना दिया।
पुलिस ने लगाया सुरक्षा घेरा
सोनामूखी पुलिस ने शेल के आसपास बैरिकेड लगाकर लोगों की आवाजाही रोक दी है। स्थानीय ग्रामीणों और मछुआरों को भी इलाके से दूर रहने की सलाह दी गई है। पुलिस की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि किसी व्यक्ति या मवेशी के शेल के संपर्क में आने से कोई दुर्घटना न हो। बम निरोधक विशेषज्ञों के मौके पर पहुंचने के बाद ही इसकी प्रकृति और स्थिति की स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।
पहले भी मिल चुके हैं पुराने मोर्टार शेल
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, डीहीपाड़ा ग्राम पंचायत क्षेत्र में इससे पहले भी दामोदर नदी के किनारे पुराने मोर्टार शेल मिलने की घटनाएं हुई हैं। कुछ महीने पहले कथित तौर पर तीन ऐसे शेल मिलने के बाद सेना के बम निरोधक दस्ते ने उन्हें नियंत्रित विस्फोट के जरिए निष्क्रिय किया था। बार-बार ऐसे संदिग्ध सैन्य अवशेष मिलने से स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि दामोदर नदी के किनारे कई लोग रोजाना मछली पकड़ने और दूसरे कामों के लिए पहुंचते हैं।
द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़ा हो सकता है इलाका
स्थानीय इतिहास से जुड़े जानकारों के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पश्चिम बंगाल का यह क्षेत्र सैन्य गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण था। पानागढ़ और दुर्गापुर के आसपास मित्र राष्ट्रों की सैन्य गतिविधियां और प्रशिक्षण केंद्र मौजूद थे। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण इलाके में पुराने सैन्य उपकरण या बिना फटे विस्फोटक अवशेष मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, *मौजूदा शेल की उम्र और उसके इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी की पुष्टि विशेषज्ञ जांच के बाद ही हो सकेगी।
नदी के पूरे इलाके में तलाशी की मांग
डीहीपाड़ा ग्राम पंचायत के प्रधान मृत्युंजय विश्वास के मुताबिक, घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन को सूचित किया गया। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों को संदिग्ध वस्तु से दूर रहने को कहा गया है और सेना को भी जानकारी दी गई है। उन्होंने यह भी मांग की कि जिस इलाके में पहले भी ऐसे शेल मिल चुके हैं, वहां नदी के किनारे और रेत वाले हिस्सों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया जाए। स्थानीय स्तर पर मेटल डिटेक्टर की मदद से जांच कराने की मांग भी उठी है।
ग्रामीणों में डर, सुरक्षा जांच की मांग
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि दामोदर नदी उनके रोजमर्रा के जीवन और आजीविका का अहम हिस्सा है। मछली पकड़ने से लेकर खेती और अन्य कामों के लिए लोग नदी के आसपास आते-जाते हैं। ऐसे में पुराने सैन्य अवशेष मिलने की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन सिर्फ मिले हुए शेल को हटाने तक सीमित न रहे, बल्कि आसपास के नदी तट और रेत वाले इलाकों की भी विस्तृत जांच कराए, ताकि भविष्य में किसी संभावित दुर्घटना को रोका जा सके।
लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
संदिग्ध मोर्टार शेल या किसी भी पुराने विस्फोटक जैसी वस्तु मिलने पर उसे *छूना, हिलाना या हटाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए*। ऐसी स्थिति में तुरंत पुलिस या स्थानीय प्रशासन को सूचना देना और सुरक्षित दूरी बनाए रखना सबसे जरूरी है।