नई दिल्ली/कोलकाता: कलकत्ता हाईकोर्ट में वकील के गाउन और बैंड पहनकर पैरवी करने पहुंचीं पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने गुरुवार (14 मई, 2026) को इस मामले पर संज्ञान लेते हुए पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से ममता बनर्जी के नामांकन और उनके पेशेवर अभ्यास (Professional Practice) की स्थिति पर 48 घंटों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
क्या है पूरा विवाद?
गुरुवार सुबह ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा से संबंधित एक मामले में पैरवी करने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने सफेद एडवोकेट बैंड और वकीलों वाला काला गाउन पहना हुआ था। उन्होंने कोर्ट के सामने दलीलें भी पेश कीं। मीडिया में आई इन तस्वीरों और खबरों के बाद BCI ने नियमों की जांच शुरू कर दी है।
BCI ने रिपोर्ट में क्या पूछा?
BCI के प्रधान सचिव श्रीमंतो सेन द्वारा जारी पत्र में पश्चिम बंगाल बार काउंसिल के सचिव को दो दिनों के भीतर निम्नलिखित रिकॉर्ड देने का निर्देश दिया गया है:
क्या ममता बनर्जी एक वकील के रूप में नामांकित हैं?
2011 से 2026 तक मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान उनके वकालत के लाइसेंस की स्थिति क्या थी?
क्या उन्होंने मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए अपना लाइसेंस निलंबित (Suspend) किया था?
क्या उन्होंने दोबारा अभ्यास शुरू करने के लिए लाइसेंस को पुनर्जीवित (Revive) कराने की प्रक्रिया पूरी की है?
क्या कहता है नियम?
प्रचलित नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी संवैधानिक पद पर आसीन होता है या सवैतनिक रोजगार (Gainful Employment) में होता है, तो उसे अपना वकालत का लाइसेंस निलंबित करना पड़ता है। दोबारा वकालत शुरू करने के लिए औपचारिक रूप से बार काउंसिल को सूचित कर लाइसेंस बहाल कराना अनिवार्य होता है।
BCI ने स्पष्ट किया कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए वह कोई राय व्यक्त नहीं करना चाहता, लेकिन संवैधानिक पद पर रहने के कारण उनके वकालत करने की पात्रता की जांच करना आवश्यक है। अब सबकी नजरें पश्चिम बंगाल बार काउंसिल की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस कानूनी उलझन को स्पष्ट करेगी।