कोलकाता: दिल्ली और बिहार के बाद अब पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में महिलाओं को साधने के लिए बीजेपी ने बड़ा दांव खेला है। बीजेपी ने अपने 'संकल्प पत्र' के वादे को जमीन पर उतारते हुए महिलाओं को हर महीने 3000 रुपये का भत्ता देने के लिए 'मातृशक्ति भरोसा कार्ड' बांटने का अभियान शुरू कर दिया है। हालांकि, चुनाव आचार संहिता के बीच इस कदम ने एक बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है।
केंद्रीय मंत्रियों ने किया कार्ड वितरण का शुभारंभ
बंगाली नववर्ष के पहले दिन केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और स्मृति ईरानी ने इस अभियान की शुरुआत की। कोलकाता में स्मृति ईरानी ने पांच महिलाओं को प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर वाला यह कार्ड सौंपा, वहीं कालना में निर्मला सीतारमण ने 10 बुनकर महिलाओं को इसे वितरित किया। इस अभियान के तहत बीजेपी कार्यकर्ता घर-घर जाकर महिलाओं का विवरण, बैंक खाता नंबर और फोटो एकत्र कर रहे हैं।
ममता बनर्जी का तीखा हमला
इस वितरण की खबर मिलते ही इस्लामपुर की जनसभा से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी पर तीखा प्रहार किया। ममता ने कहा, "चुनाव के समय केंद्रीय वित्त मंत्री खुद कार्ड बांट रही हैं, यह नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाना है। मैं चुनाव आयोग से उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील करती हूं।" उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली में भी महिलाओं को 2500 रुपये देने का वादा किया गया था जो आज तक पूरा नहीं हुआ।
आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप
तृणमूल कांग्रेस ने इस मामले में चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई है। टीएमसी का तर्क है कि चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार के नकद भत्ते का वादा करने वाले कार्ड बांटना अवैध है। दूसरी ओर, बीजेपी उम्मीदवारों का तर्क है कि पिछली बार टीएमसी ने भी 'लक्ष्मी भंडार' के वादे किए थे। हालांकि, रिकॉर्ड बताते हैं कि 'लक्ष्मी भंडार' एक चुनावी वादा था और उसका क्रियान्वयन सरकार बनने के बाद शुरू हुआ था, जबकि यहाँ मतदान से पहले ही कार्ड बांटे जा रहे हैं। वर्तमान में दुर्गापुर, रानीगंज, झाड़ग्राम और बनगांव जैसे इलाकों में यह कार्ड वितरण जोरों पर है, जिसे लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर सबकी नजरें टिकी हैं।