कोलकाता: पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा से पहले धर्म और राजनीति से जुड़ा एक नया घटनाक्रम सामने आया है। मंगलवार को कोलकाता के अलीमुद्दीन मार्ग स्थित माकपा के राज्य मुख्यालय मुजफ्फर अहमद भवन के पास लोगों के एक समूह ने चंडी पाठ किया। कार्यक्रम में चंडी पाठ के श्लोकों का पाठ किया गया। आयोजकों की आधिकारिक पहचान फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सकी है। हालांकि, कार्यक्रम में शामिल एक प्रतिभागी ने इसे सनातन धर्म के कथित अपमान के विरोध से जोड़कर बताया। माकपा नेता सुजन चक्रवर्ती ने आयोजन पर व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया दी।
माकपा मुख्यालय के बाहर किया गया चंडी पाठ
मंगलवार को कोलकाता के अलीमुद्दीन मार्ग स्थित माकपा के राज्य मुख्यालय के पास चंडी पाठ का आयोजन किया गया। यह स्थान माकपा के राज्य मुख्यालय मुजफ्फर अहमद भवन के नजदीक है। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने चंडी पाठ के श्लोकों का पाठ किया। दुर्गा पूजा से ठीक पहले हुए इस आयोजन ने राजनीतिक और धार्मिक चर्चा को जन्म दिया। हालांकि, कार्यक्रम के आयोजकों की आधिकारिक पहचान स्पष्ट नहीं हो पाई है। कार्यक्रम में शामिल गौरांग दास ने आयोजन के पीछे धार्मिक अधिकार जताने की बात कही। उन्होंने इसे सनातन धर्म के कथित अपमान के विरोध से जोड़कर पेश किया। घटना के बाद माकपा मुख्यालय के आसपास का यह आयोजन चर्चा का विषय बन गया।
प्रतिभागी ने बताया आयोजन का मकसद
कार्यक्रम में शामिल गौरांग दास ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य अपने धर्म का पालन करने के अधिकार को जताना था। उनके अनुसार, यह कार्यक्रम ऐसी पार्टी के कार्यालय के बाहर किया गया, जिसकी विचारधारा पारंपरिक रूप से नास्तिकता से जुड़ी रही है। दास ने आरोप लगाया कि वामपंथियों ने हमेशा सनातन धर्म का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से माकपा कार्यालय के बाहर धार्मिक पाठ करने का फैसला लिया गया। उनका कहना था कि अब उन्हें अपने धर्म का पालन करने से कोई नहीं रोक सकता। हालांकि, ये दावे कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागी के हैं। कार्यक्रम के आयोजकों की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इस वजह से आयोजन की पृष्ठभूमि को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
सुजन चक्रवर्ती ने दी व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया
माकपा के वरिष्ठ नेता सुजन चक्रवर्ती ने चंडी पाठ के आयोजन पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने चंडी पाठ के श्लोकों के उच्चारण के तरीके पर सवाल उठाया। चक्रवर्ती ने व्यंग्य करते हुए कहा कि माकपा के कार्यकर्ता प्रतिभागियों को सही तरीके से चंडी पाठ करना सिखा सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि आयोजन से कोई खास राजनीतिक या धार्मिक उद्देश्य हासिल नहीं होगा। उनकी टिप्पणी के बाद यह मामला राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया। माकपा नेता की प्रतिक्रिया को आयोजन पर पार्टी के व्यंग्य के तौर पर देखा जा रहा है। दूसरी ओर, आयोजन में शामिल लोगों ने इसे धार्मिक अधिकार से जुड़ा मुद्दा बताया। इस तरह चंडी पाठ का यह कार्यक्रम धर्म और राजनीति के बीच चर्चा का नया विषय बन गया।
क्या है चंडी पाठ और दुर्गा पूजा से इसका संबंध?
चंडी पाठ को दुर्गा सप्तशती और देवी महात्म्य के नाम से भी जाना जाता है। यह हिंदू धार्मिक परंपरा में देवी दुर्गा की आराधना से जुड़ा महत्वपूर्ण पाठ माना जाता है। इसमें देवी शक्ति और राक्षस महिषासुर के बीच संघर्ष तथा देवी की विजय का वर्णन मिलता है। नवरात्रि और दुर्गा पूजा के दौरान चंडी पाठ का धार्मिक महत्व विशेष माना जाता है। कई स्थानों पर पूजा-अनुष्ठानों के दौरान इसके श्लोकों का पाठ किया जाता है। इसी धार्मिक महत्व के कारण दुर्गा पूजा से पहले हुए इस आयोजन को खास नजर से देखा गया। कोलकाता में दुर्गा पूजा का सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव भी काफी व्यापक है। ऐसे में माकपा कार्यालय के पास चंडी पाठ ने धार्मिक मुद्दे को राजनीतिक चर्चा से जोड़ दिया।
आयोजकों की पहचान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं
चंडी पाठ कार्यक्रम के आयोजकों की आधिकारिक पहचान अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। कार्यक्रम में शामिल गौरांग दास ने खुद को इस विषय का विशेषज्ञ बताया। उन्होंने आयोजन को धार्मिक अधिकार जताने की पहल के रूप में पेश किया। हालांकि, किसी संगठन की ओर से कार्यक्रम की औपचारिक जिम्मेदारी सामने नहीं आई। माकपा मुख्यालय के बाहर आयोजन होने के कारण इसकी राजनीतिक चर्चा जरूर शुरू हो गई। सुजन चक्रवर्ती की प्रतिक्रिया ने भी इस मामले को और सुर्खियों में ला दिया। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में आयोजन के पीछे किसी राजनीतिक संगठन की आधिकारिक भूमिका की पुष्टि नहीं है। मामला ऐसे समय सामने आया है, जब पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं।