दीघा: समुद्र की लहरें, शरद ऋतु की सुहानी शाम और खुले आसमान में रोशनी से उभरती मां दुर्गा की भव्य छवि। पश्चिम बंगाल के लोकप्रिय समुद्री पर्यटन स्थल दीघा में गुरुवार शाम कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। करीब 3000 ड्रोन की मदद से आसमान में रंग-बिरंगी आकृतियां बनाई गईं, जिनमें मां दुर्गा की छवि और उनके आगमन का संदेश खास आकर्षण रहा। इस अनोखे नजारे को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग समुद्र तट पर जुटे।
पश्चिम बंगाल सरकार की पहल से सजा दीघा का आसमान
दुर्गापूजा से पहले मां के धरती पर आगमन का संदेश लोगों तक पहुंचाने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार के सूचना एवं संस्कृति विभाग की ओर से इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आधुनिक तकनीक और बंगाल की पारंपरिक सांस्कृतिक भावनाओं के मेल ने कार्यक्रम को खास बना दिया। ड्रोन के सटीक तालमेल से आसमान में तैयार की गई रोशनी की आकृतियों ने दर्शकों का ध्यान खींचा।
बंगाल में ढाक की थाप, शिउली के फूलों की खुशबू और काश के सफेद फूलों के साथ मां दुर्गा के आगमन का स्वागत करने की परंपरा रही है। दीघा में इसी पारंपरिक भावना को तकनीक के जरिए एक नए अंदाज में पेश किया गया। खुले आसमान को कैनवास बनाकर तैयार किए गए इस दृश्य ने दुर्गोत्सव के उत्साह को और बढ़ा दिया।
समुद्र की लहरों के बीच मां दुर्गा की झलक ने मोहा मन
सूर्यास्त के बाद दीघा समुद्र तट पर उत्सव का माहौल और भी जीवंत हो गया। पर्यटकों के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी भी इस विशेष ड्रोन शो को देखने पहुंचे। आसमान में एक के बाद एक उभरती रोशनी की आकृतियों के बीच जब मां दुर्गा की छवि दिखाई दी, तो यह शाम का प्रमुख आकर्षण बन गया।
समुद्र की लहरों के सामने खड़े होकर खुले आसमान में इस तरह का तकनीक आधारित कार्यक्रम देखना लोगों के लिए एक अलग अनुभव रहा। दुर्गापूजा के दौरान आमतौर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों, संगीत और रोशनी के जरिए मां के आगमन का संदेश दिया जाता है। लेकिन करीब 3000 ड्रोन के समन्वय से आसमान में मां दुर्गा की आकृति उकेरने ने इस आयोजन को एक अलग पहचान दी।
महालया पर कोलकाता के ईडन गार्डन्स में भी हुआ था ड्रोन शो
महालया के साथ ही बंगाल में देवपक्ष की शुरुआत होती है और दुर्गापूजा का इंतजार अपने चरम पर पहुंचने लगता है। पितृपक्ष की समाप्ति और देवपक्ष के आगमन का बंगाल की संस्कृति में विशेष महत्व है। इसी परंपरा को नई पीढ़ी तक आकर्षक तरीके से पहुंचाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
महालया के दिन कोलकाता के ईडन गार्डन्स में आयोजित ड्रोन शो के जरिए दुर्गोत्सव के आगमन को एक नए अंदाज में पेश किया गया था। इसी पहल की कड़ी में दीघा के समुद्र तट पर भी मां दुर्गा की अगवानी का विशेष आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से पारंपरिक उत्सव को आधुनिक प्रस्तुति के साथ लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
पर्यटन के नक्शे पर दीघा को मिल सकती है नई पहचान
दीघा लंबे समय से पश्चिम बंगाल के प्रमुख समुद्री पर्यटन स्थलों में शामिल है। दुर्गापूजा के दौरान यहां पर्यटकों की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में ड्रोन शो जैसे विशेष आयोजन समुद्र तट के आकर्षण को और बढ़ा सकते हैं। प्राकृतिक सुंदरता के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों और तकनीक आधारित मनोरंजन का मेल पर्यटकों के लिए नए अनुभव तैयार करता है।
खासतौर पर परिवार के साथ घूमने आए लोगों, बच्चों और युवाओं के लिए ड्रोन शो आकर्षण का केंद्र बना। इस तरह के आयोजन बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक माध्यमों से प्रस्तुत करने का अवसर भी देते हैं।
हालांकि, इस कार्यक्रम की खासियत केवल रंग-बिरंगी रोशनी तक सीमित नहीं रही। मां दुर्गा के आगमन से जुड़ी बंगाल की भावनाओं को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ना इसकी प्रमुख विशेषता रही।
रोशनी के जरिए दिया मां के आगमन का संदेश
उमा के मायके लौटने की खुशी में जब पूरा बंगाल दुर्गोत्सव की तैयारी में जुटा है, तब दीघा के आसमान में 3000 ड्रोन की रोशनी ने उत्सव के उल्लास को एक नया रंग दिया। समुद्र का नजारा, शरद ऋतु की शाम और आसमान में चमकती मां दुर्गा की छवि ने मिलकर एक यादगार दृश्य तैयार किया।
पश्चिम बंगाल सरकार के सूचना एवं संस्कृति विभाग की इस पहल ने मां की अगवानी को एक अलग अंदाज में प्रस्तुत किया। परंपरा और आधुनिक तकनीक के इस संगम ने दीघा की शाम को खास बना दिया। पर्यटकों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी तथा उनके उत्साह ने इस आयोजन को दुर्गापूजा से पहले के उत्सवी माहौल का महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया।