विधानसभा चुनाव 2026 के बीच Election Commission of India ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैल रहे भ्रामक और फर्जी कंटेंट के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले किसी भी AI-जनरेटेड, डीपफेक या छेड़छाड़ किए गए कंटेंट पर सूचना मिलने के 3 घंटे के भीतर कार्रवाई अनिवार्य होगी।
AI कंटेंट पर सख्त नियम
चुनाव आयोग ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नया नियम लागू किया है कि किसी भी राजनीतिक प्रचार में इस्तेमाल होने वाले AI-जनरेटेड या डिजिटल रूप से बदले गए कंटेंट पर “AI Generated” या “Digitally Enhanced” का स्पष्ट लेबल लगाना होगा। साथ ही कंटेंट के स्रोत की जानकारी भी सार्वजनिक करनी होगी।
11,000 से ज्यादा पोस्ट हटाए गए
आयोग के अनुसार, 15 मार्च 2026 से अब तक 11,000 से अधिक आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट और URLs हटाए जा चुके हैं। कई मामलों में FIR दर्ज की गई है, जबकि भ्रामक जानकारी का आधिकारिक खंडन भी जारी किया गया है।
C-Vigil ऐप पर रिकॉर्ड शिकायतें
आयोग की निगरानी व्यवस्था के तहत C-Vigil ऐप पर 15 मार्च से 19 अप्रैल के बीच कुल 3,23,099 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें से 96.01% शिकायतों का समाधान 100 मिनट के भीतर कर दिया गया।
फेक नैरेटिव और डीपफेक पर लगाम
चुनाव आयोग ने कहा है कि अब फेक नैरेटिव और डीपफेक तकनीक के जरिए मतदाताओं को गुमराह करने की कोशिशों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। आईटी नोडल अधिकारी लगातार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर नजर बनाए हुए हैं।
48 घंटे का साइलेंस पीरियड लागू
आयोग ने यह भी दोहराया कि मतदान से 48 घंटे पहले शुरू होने वाले साइलेंस पीरियड के दौरान टीवी, रेडियो, प्रिंट और सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार का चुनावी प्रचार पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।