पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए I-PAC के को-फाउंडर और डायरेक्टर विनेश चंदेल को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी करोड़ों रुपये के कथित कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में की गई है। इस कार्रवाई के बाद बंगाल की राजनीति में बड़ा सियासी घमासान छिड़ गया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान से महज 10 दिन पहले हुई इस गिरफ्तारी ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। केंद्रीय एजेंसी ने सोमवार देर रात दिल्ली में लंबी पूछताछ के बाद विनेश चंदेल को PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के तहत हिरासत में लिया। ED अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी को मंगलवार को विशेष अदालत में पेश किया जाएगा, जहां एजेंसी आगे की पूछताछ के लिए रिमांड की मांग करेगी।
कोयला घोटाले से जुड़ा बड़ा आरोप
जांच एजेंसी का दावा है कि पश्चिम बंगाल में अवैध कोयला खनन से हुई काली कमाई का एक हिस्सा हवाला नेटवर्क के जरिए I-PAC तक पहुंचाया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 20 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन की जांच चल रही है। ED को शक है कि इस फंड का इस्तेमाल राजनीतिक रणनीति और चुनावी अभियानों में किया गया।
पहले भी जांच के घेरे में रहा I-PAC
यह पहली बार नहीं है जब I-PAC एजेंसियों के रडार पर आया हो। इससे पहले जनवरी में कोलकाता स्थित एक डायरेक्टर के घर पर छापेमारी हुई थी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।
अभिषेक बनर्जी का तीखा हमला (X पोस्ट)
गिरफ्तारी के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर कड़ा हमला बोला।
उन्होंने लिखा:
“I-PAC के सह-संस्थापक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी, जो बंगाल चुनाव से महज 10 दिन पहले हुई है, केवल चिंताजनक नहीं है—यह ‘लेवल प्लेइंग फील्ड’ की पूरी अवधारणा को हिला देती है। जिस समय पश्चिम बंगाल को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की ओर बढ़ना चाहिए, ऐसे कदम यह संदेश देते हैं कि अगर आप विपक्ष के साथ काम करते हैं तो आप भी अगले हो सकते हैं। यह लोकतंत्र नहीं है—यह डराने की राजनीति है! जो बात और भी अधिक चिंताजनक है, वह है दोहरा रवैया। जिन पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, वे जैसे ही दूसरी तरफ जाते हैं, उन्हें संरक्षण मिल जाता है, जबकि दूसरों को राजनीतिक रूप से सुविधाजनक समय पर तेजी से निशाना बनाया जाता है। जब लोकतंत्र की रक्षा करने वाली संस्थाएं दबाव के उपकरण जैसी लगने लगती हैं, तो विश्वास कमजोर होने लगता है…”
बंगाल की राजनीति में भूचाल
इस गिरफ्तारी के बाद पश्चिम बंगाल की सियासत में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। टीएमसी ने इसे राजनीतिक साजिश बताया है, जबकि ED ने इसे कानून के तहत की गई कार्रवाई करार दिया है। राज्य में चुनावी माहौल के बीच इस मामले ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है।