कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद बंद पड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों को दोबारा शुरू करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। बैरकपुर क्षेत्र की कई जूट मिलों के दोबारा शुरू होने के बाद अब हुगली जिले की चार बंद जूट मिलें भी जल्द खुलने जा रही हैं। राज्य के श्रम मंत्री अर्जुन सिंह की पहल पर इस प्रक्रिया को गति मिली है।
इन जूट मिलों में फिर शुरू होगा उत्पादन
प्राप्त जानकारी के अनुसार चंदननगर की गोंदलपाड़ा जूट मिल, श्रीरामपुर की इंडिया जूट मिल तथा रिशड़ा की हेस्टिंग्स जूट मिल और वेलिंगटन जूट मिल अगले कुछ दिनों में दोबारा संचालित की जाएंगी। इन मिलों के शुरू होने से हजारों श्रमिकों और उनके परिवारों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
श्रमिकों में जगी नई उम्मीद
लंबे समय से बंद पड़ी इन जूट मिलों के खुलने की खबर से श्रमिकों में उत्साह का माहौल है। वर्षों से रोजगार की समस्या से जूझ रहे हजारों परिवारों को अब स्थायी आय का स्रोत मिलने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर भी औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।
सरकार जूट उद्योग को दे रही प्राथमिकता
श्रीरामपुर के विधायक एवं राज्य के राज्यमंत्री भास्कर भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य सरकार जूट उद्योग को विशेष महत्व दे रही है। उन्होंने कहा कि चारों जूट मिलों के दोबारा शुरू होने से श्रमिकों के चेहरों पर मुस्कान लौटेगी। साथ ही सरकार ने मिल मालिकों से श्रमिक बस्तियों के विकास के लिए भी आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार भविष्य में भी मिलों और कारखानों के सुचारु संचालन के लिए हरसंभव सहयोग करेगी।
अर्जुन सिंह की पहल लाई रंग
श्रम मंत्री बनने के बाद अर्जुन सिंह लगातार जूट मिल मालिकों के साथ बैठकें कर रहे हैं और बंद मिलों को पुनः चालू कराने के लिए प्रयासरत हैं। जानकारों का मानना है कि सरकार और उद्योग प्रबंधन के बीच लगातार संवाद का ही परिणाम है कि अब हुगली की चार प्रमुख जूट मिलों के फिर से संचालन का रास्ता साफ हुआ है। इससे राज्य के जूट उद्योग को नई गति मिलने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।