हुगली: पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के जंगीपाड़ा थाना क्षेत्र के राधानगर में तृणमूल कांग्रेस के एक पंचायत प्रतिनिधि के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। स्थानीय ग्राम पंचायत के उप-प्रधान जयदेब शील, जिन्हें बाबलू शील के नाम से भी जाना जाता है, पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया। आरोप है कि भीड़ ने उनके कपड़े उतारे, कमर में रस्सी बांधी और बाजार में घुमाया। इस दौरान उन पर अंडे फेंके जाने की भी बात सामने आई है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई। सूचना मिलने पर जंगीपाड़ा थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और उप-प्रधान को भीड़ से मुक्त कराया। घटना के पीछे शिक्षक भर्ती और 100 दिवसीय ग्रामीण रोजगार योजना में कथित अनियमितताओं को लेकर लोगों की नाराजगी की बात कही जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
शिक्षक भर्ती और 100 दिन के काम में भ्रष्टाचार के आरोप
स्थानीय लोगों के एक वर्ग का आरोप है कि जयदेब शील के खिलाफ लंबे समय से वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें थीं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कुछ लोगों से शिक्षक की नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लिए गए थे, लेकिन उन्हें न नौकरी मिली और न ही कथित तौर पर दी गई रकम वापस की गई। इसके अलावा, ग्रामीण रोजगार योजना और आवास योजना से संबंधित लाभार्थियों तथा सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि लंबे समय से शिकायतों का समाधान नहीं होने के कारण लोगों में नाराजगी बढ़ती गई।हालांकि, इन आरोपों के संबंध में किसी आधिकारिक जांच रिपोर्ट या न्यायिक निष्कर्ष की पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि उप-प्रधान के खिलाफ लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
बाजार में घेरकर बदसलूकी करने का आरोप
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जयदेब शील जब बाजार क्षेत्र से गुजर रहे थे, तभी कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया। बताया जा रहा है कि शुरुआत में पैसों के लेन-देन और कथित भ्रष्टाचार को लेकर विवाद हुआ, जो बाद में बढ़ गया। आरोप है कि भीड़ ने उनके कपड़े फाड़ दिए, कमर में रस्सी बांधी और उन्हें बाजार में घुमाया। इस दौरान कुछ लोगों ने उन पर अंडे फेंके और नारेबाजी की। घटना के कारण बाजार क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर जंगीपाड़ा पुलिस ने हस्तक्षेप किया और उप-प्रधान को भीड़ से बाहर निकाला। घटना के बाद उनकी चिकित्सकीय जांच या उपचार की स्थिति के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
कल्याण बनर्जी ने भाजपा पर लगाया आरोप
घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। श्रीरामपुर से तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने इस घटना की निंदा करते हुए भाजपा पर राजनीतिक हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने पुलिस से घटना में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। हालांकि, घटना के पीछे भाजपा की भूमिका होने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस दावे को तृणमूल सांसद के राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
स्थानीय विधायक ने भ्रष्टाचार के आरोपों का उठाया मुद्दा
जंगीपाड़ा के विधायक प्रसेनजीत बाग ने भी घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पंचायत स्तर पर कथित भ्रष्टाचार को लेकर लोगों में नाराजगी रही है। उन्होंने हिंसा और कानून हाथ में लेने का समर्थन नहीं किया, लेकिन इसे स्थानीय असंतोष से जोड़कर देखा। इस तरह, घटना के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। एक ओर तृणमूल कांग्रेस इसे राजनीतिक हिंसा बता रही है, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर स्थानीय असंतोष की चर्चा की जा रही है।
पुलिस ने शुरू की जांच, दोषियों की पहचान की जा रही है
हुगली ग्रामीण पुलिस की ओर से मामले में कानूनी कार्रवाई और जांच की बात कही गई है। वायरल वीडियो तथा घटनास्थल से जुड़ी जानकारी के आधार पर कथित तौर पर मारपीट और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस के सामने यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई, इसमें कौन-कौन शामिल था और क्या उप-प्रधान के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पहले कोई शिकायत दर्ज कराई गई थी।
कानून हाथ में लेने से नहीं होगा विवाद का समाधान
राधानगर की घटना ने पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोपों और राजनीतिक तनाव के बीच कानून-व्यवस्था का सवाल फिर खड़ा कर दिया है। यदि किसी जनप्रतिनिधि के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत है, तो उसकी जांच संबंधित एजेंसियों के माध्यम से होनी चाहिए। इसी तरह, किसी व्यक्ति को भीड़ द्वारा अपमानित करना या उसके साथ हिंसक व्यवहार करना कानून के शासन के लिए गंभीर चुनौती है। फिलहाल, पुलिस जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों का इंतजार है। जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के लिए किसकी क्या जिम्मेदारी है और भ्रष्टाचार के आरोपों में कितनी सच्चाई है।