इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (ISKCON) ने अपने एक वरिष्ठ संन्यासी को सभी आधिकारिक जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है। साथ ही उन्हें संगठन की ओर से मीडिया, सरकारी एजेंसियों या किसी भी सार्वजनिक मंच पर प्रतिनिधित्व करने और बयान देने से रोक दिया गया है।
खुद दी फैसले की जानकारी
वरिष्ठ संन्यासी ने सार्वजनिक बयान जारी कर कहा कि वह ISKCON नेतृत्व के फैसले का सम्मान करेंगे और भविष्य में संगठन की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने मीडिया से भी अनुरोध किया कि उन्हें ISKCON के प्रतिनिधि के रूप में इंटरव्यू या प्रतिक्रिया के लिए संपर्क न किया जाए।
इन मुद्दों का किया जिक्र
अपने बयान में उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं और भक्तों पर कथित अत्याचार का मुद्दा उठाना, चिन्मय कृष्ण प्रभु के समर्थन में बोलना, मेनका गांधी के खिलाफ कानूनी नोटिस भेजना, कॉमेडियन सुरलीन कौर के खिलाफ साइबर शिकायत दर्ज कराना और सनातन धर्म के समर्थन में सार्वजनिक बयान देना उन कारणों में शामिल हैं, जिनके चलते यह कार्रवाई हुई।
रिपब्लिक टीवी इंटरव्यू बना निर्णायक मोड़
संन्यासी ने दावा किया कि 29 मई 2026 को रिपब्लिक टीवी को दिया गया उनका इंटरव्यू इस कार्रवाई का "आखिरी कारण" बना। उन्होंने कहा कि इसके बाद संगठन ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाया।
समर्थकों का जताया आभार
फैसले के बावजूद वरिष्ठ संन्यासी ने वर्षों से मिले प्रेम और समर्थन के लिए सभी का धन्यवाद किया। उन्होंने ISKCON की निरंतर प्रगति, सेवा और वैश्विक विस्तार के लिए शुभकामनाएं भी व्यक्त कीं।