कोलकाता: जादवपुर विश्वविद्यालय में हालिया हिंसा और कथित राजनीतिक गतिविधियों को लेकर सोमवार को दक्षिणापण से विरोध मार्च निकाला गया। शाम करीब 4 बजे शुरू हुई इस रैली में शिक्षक, प्रोफेसर, स्कूल शिक्षक और बुद्धिजीवी वर्ग से जुड़े लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने ‘शिक्षा बचाओ, जादवपुर बचाओ’ के नारे लगाए और विश्वविद्यालय के मौजूदा माहौल को लेकर चिंता जताई। रैली के दौरान वक्ताओं ने विश्वविद्यालय परिसर में कथित माओवादी, शहरी नक्सली और देशविरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए इनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
‘शिक्षा बचाओ, जादवपुर बचाओ’ के नारों से गूंजा इलाका
दक्षिणापण से जैसे ही मार्च आगे बढ़ा, प्रदर्शनकारियों ने लगातार ‘शिक्षा बचाओ, जादवपुर बचाओ’ के नारे लगाए। रैली में शामिल लोगों का कहना था कि विश्वविद्यालय किसी भी तरह की हिंसा और राजनीतिक दबाव से मुक्त होना चाहिए शिक्षकों और बुद्धिजीवियों ने कहा कि जादवपुर विश्वविद्यालय की पहचान शिक्षा, शोध और अकादमिक स्वतंत्रता से है। उनका आरोप है कि हाल की घटनाओं से परिसर का माहौल प्रभावित हुआ है।प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय में छात्रों की सुरक्षा और शांतिपूर्ण शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने की मांग की। रैली के दौरान लोगों में विश्वविद्यालय को लेकर नाराजगी और चिंता दोनों दिखाई दी।
माओवादी और शहरी नक्सली गतिविधियों का लगाया आरोप
रैली में संबोधित करते हुए वक्ता ने जादवपुर विश्वविद्यालय में कथित माओवादी और शहरी नक्सली प्रभाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ऐसी शक्तियां परिसर में सक्रिय हैं, जिनसे विश्वविद्यालय का शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है। वक्ता ने विश्वविद्यालय को कथित तौर पर ऐसी गतिविधियों से मुक्त कराने की बात कही और इसे ‘शुद्धिकरण’ अभियान बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि परिसर में कथित देशविरोधी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए। हालांकि, रैली में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन दावों की वास्तविकता जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।
छात्रों के बीच हिंसा और बाहरी लोगों की मौजूदगी पर सवाल
रैली के दौरान जादवपुर विश्वविद्यालय में छात्रों के बीच हुई हिंसा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। इसी सिलसिले में परिसर में बाहरी छात्रों की कथित मौजूदगी को लेकर भी सवाल किए गए। वक्ता ने कहा कि विश्वविद्यालय में छात्रों के बीच हिंसा की राजनीति लंबे समय से चिंता का विषय रही है। उन्होंने इसके लिए वामपंथी संगठनों और कथित माओवादी गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी तरह की हिंसा को स्वीकार नहीं किया जा सकता। साथ ही छात्रों की सुरक्षा और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने पर जोर दिया गया। बाहरी लोगों की मौजूदगी और उनकी भूमिका को लेकर स्थिति जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
पुराने विवादित मामलों का भी किया गया जिक्र
रैली में जादवपुर विश्वविद्यालय से जुड़े पुराने विवादित घटनाक्रमों का भी जिक्र हुआ। वक्ता ने विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति से जुड़ी कथित हिंसक घटना का हवाला देते हुए परिसर में हिंसा की पुरानी घटनाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने छात्रावास में छात्रों के कथित उत्पीड़न और आत्महत्या से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। वक्ता ने इन घटनाओं को कथित नक्सली और माओवादी प्रभाव से जोड़ते हुए अपनी बात रखी। रैली में कहा गया कि विश्वविद्यालय में किसी भी तरह की हिंसा या दबाव की स्थिति को लेकर जवाबदेही तय होनी चाहिए। साथ ही परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी उठाई गई।
शिक्षक और बुद्धिजीवी बोले- शिक्षा का माहौल सुरक्षित होना चाहिए
मार्च में शामिल शिक्षकों और बुद्धिजीवियों ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। उनका कहना था कि छात्रों को बिना डर के पढ़ाई और शोध करने का माहौल मिलना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि राजनीतिक विचारधारा चाहे किसी भी पक्ष की हो, उसका असर शिक्षा व्यवस्था और छात्रों की सुरक्षा पर नहीं पड़ना चाहिए। रैली के दौरान विश्वविद्यालय की अकादमिक पहचान को बनाए रखने पर जोर दिया गया। आयोजकों की ओर से कहा गया कि उनका उद्देश्य जादवपुर विश्वविद्यालय में कथित हिंसा और राजनीतिक हस्तक्षेप के खिलाफ आवाज उठाना है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मामले में गंभीरता से कार्रवाई करने की मांग की।
जनसभा में उठे विश्वविद्यालय की सुरक्षा से जुड़े सवाल
मार्च के बाद हुई जनसभा में भी जादवपुर विश्वविद्यालय के मौजूदा माहौल को लेकर चर्चा हुई। वक्ताओं ने परिसर में हिंसा, छात्रों की सुरक्षा और कथित राजनीतिक गतिविधियों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को ऐसा वातावरण देना जरूरी है, जहां विद्यार्थी बिना किसी दबाव के अपनी पढ़ाई कर सकें। साथ ही परिसर में बाहरी लोगों की कथित मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए गए। रैली के दौरान लगाए गए आरोपों पर अब विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया का इंतजार है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।