कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच कोलकाता की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चुनाव आयोग के आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है। सोमवार को जारी जानकारी के अनुसार, कोलकाता के लगभग 75 प्रतिशत मतदान केंद्रों को 'अति संवेदनशील' (Super Sensitive) माना गया है। हालात ऐसे हैं कि दक्षिण कोलकाता की चार विधानसभा सीटों के 100 प्रतिशत बूथ इस सूची में शामिल हैं।
क्या है 'अति संवेदनशील' बूथ का पैमाना?
उत्तर कोलकाता की जिला चुनाव अधिकारी (DEO) स्मिता पांडे ने स्पष्ट किया कि जिन बूथों पर कम से कम 150 मतदाताओं के नाम SIR (Special Investigation Report) से हटाए गए हैं, उन्हें 'अति संवेदनशील' माना गया है। अधिकारियों का मानना है कि नाम कटने से स्थानीय लोगों में असंतोष हो सकता है, जिससे शांति भंग होने की आशंका है।
सुरक्षा का अभेद्य किला
बल तैनाती: कोलकाता में अब तक 97 कंपनियां केंद्रीय बल तैनात की जा चुकी हैं, जिनमें से 53 कंपनियां केवल दक्षिण कोलकाता में हैं।
निगरानी: इन सभी बूथों पर वेबकास्टिंग की जाएगी और हर 12 से 20 बूथों पर एक क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) तैनात रहेगी।
इलाकों का हाल: उत्तर कोलकाता के श्यामपुकुर में सबसे अधिक 80 केंद्र अति संवेदनशील हैं। वहीं भवानीपुर, कोलकाता बंदरगाह, रासबिहारी और बालीगंज के सभी बूथों पर कड़ी सुरक्षा रहेगी।
राजनीतिक घमासान
तृणमूल कांग्रेस ने आयोग के इस कदम की आलोचना की है। टीएमसी महासचिव वैश्वानर चटर्जी ने कहा, "बीजेपी को जिताने के लिए आयोग केंद्रीय बलों का सहारा ले रहा है, लेकिन बंगाल की जनता ममता बनर्जी के साथ है। कोलकाता में शांतिपूर्ण माहौल के बावजूद इसे युद्धक्षेत्र बनाना साजिश है।"
अपराधियों पर नकेल
लालबाजार पुलिस ने आयोग को दागियों की सूची सौंप दी है। अब तक 33 हथियार और 83 कारतूस जब्त किए जा चुके हैं। साथ ही, फरार अपराधी 'सोनू पप्पू' पर भी नजर रखी जा रही है। पिछली बार की तरह मतगणना के दौरान बिजली गुल होने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए आधुनिक जनरेटर और पावर बैकअप की व्यवस्था की गई है।