कोलकाता: कोलकाता मेट्रो के बैरकपुर तक विस्तार का रास्ता आखिरकार साफ हो गया है। बारानगर-बैरकपुर पिंक लाइन मेट्रो परियोजना को कोलकाता नगर निगम की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी मिल गया है। करीब 16 साल से अटकी इस परियोजना के दोबारा शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। परियोजना के तहत बीटी रोड के किनारे मेट्रो कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। मेट्रो के शुरू होने से उत्तर कोलकाता और आसपास के उपनगरीय इलाकों में आवाजाही आसान होने की उम्मीद है। लंबे समय से इस रूट पर रहने वाले लोगों को तेज और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन का इंतजार था। एनओसी मिलने के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।
बारानगर-बैरकपुर पिंक लाइन पर होंगे 11 स्टेशन
बारानगर-बैरकपुर मेट्रो कॉरिडोर करीब 12 किलोमीटर लंबा होगा। यह पिंक लाइन के तहत विकसित किया जाएगा और पूरी तरह ऊपरी मार्ग पर चलेगा। यानी इस रूट पर मेट्रो के लिए भूमिगत सुरंग नहीं बनाई जाएगी। कॉरिडोर पर कुल 11 स्टेशन प्रस्तावित हैं। इनमें बारानगर, कमरहटी, अगरपारा, पनिहाटी और सुखचर प्रमुख स्टेशन होंगे। इसके अलावा सोदपुर, खरदाह, टाटा गेट, टीटागढ़, तलपुकुर और बैरकपुर स्टेशन भी इस रूट में शामिल होंगे। इन स्टेशनों के जरिए बीटी रोड से जुड़े कई घनी आबादी वाले इलाकों को मेट्रो सुविधा मिल सकेगी।
मुख्यमंत्री ने कोलकाता नगर निगम का जताया आभार
पिंक लाइन परियोजना को एनओसी मिलने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता नगर निगम के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बीटी रोड के साथ बारानगर-बैरकपुर मेट्रो कॉरिडोर के लिए एनओसी जारी किया जाना महत्वपूर्ण कदम है। उनके मुताबिक, इससे कोलकाता के उत्तरी उपनगरों में तेज सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का विस्तार होगा। मेट्रो शुरू होने पर यात्रियों के यात्रा समय में कमी आने की उम्मीद है। साथ ही बीटी रोड जैसी महत्वपूर्ण सड़कों पर यातायात का दबाव भी कम हो सकता है। इससे रोजाना सफर करने वाले लोगों को सुरक्षित और आधुनिक परिवहन सुविधा मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने इस फैसले के लिए कोलकाता नगर निगम का आभार भी जताया।
2010 में मिली थी परियोजना को मंजूरी
बारानगर-बैरकपुर मेट्रो परियोजना का इतिहास करीब 16 साल पुराना है। लगभग 12 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को वर्ष 2010 में मंजूरी मिली थी। उस समय ममता बनर्जी देश की रेल मंत्री थीं। वर्ष 2011 में राज्य में सरकार बदलने के बाद इस परियोजना का काम आगे नहीं बढ़ सका। इसके बाद बीटी रोड के नीचे मौजूद पेयजल पाइपलाइनों को लेकर बड़ी अड़चन सामने आई। परियोजना को लेकर लंबे समय तक बैठकों और तकनीकी स्तर पर समाधान तलाशने की कोशिश होती रही। लेकिन पाइपलाइन से जुड़े जोखिम के कारण मेट्रो निर्माण का काम ठप रहा। अब एनओसी मिलने के बाद इस लंबे समय से रुकी परियोजना के आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है।
पाइपलाइन बनी थी सबसे बड़ी बाधा
बारानगर-बैरकपुर मेट्रो परियोजना के रास्ते में सबसे बड़ी समस्या बीटी रोड के नीचे मौजूद पेयजल पाइपलाइन थी। जानकारी के मुताबिक, सड़क के नीचे 60 इंच और 42 इंच की दो बड़ी पाइपलाइनें मौजूद हैं। इन पाइपलाइनों के जरिए पाल्टा जल शोधन संयंत्र से बड़ी मात्रा में पेयजल ताला जलाशय तक पहुंचाया जाता है। आशंका थी कि मेट्रो निर्माण के दौरान पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई तो उत्तर कोलकाता के लाखों लोगों की जलापूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से निर्माण कार्य को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंता बनी रही। इस समस्या के समाधान के लिए 64 इंच की वैकल्पिक पाइपलाइन भी बिछाई गई थी। इसके बावजूद परियोजना को आगे बढ़ाने में लंबे समय तक सफलता नहीं मिल सकी।
नई पाइपलाइन से दूर होगी अड़चन
अब पाइपलाइन की समस्या को दूर करने के लिए नई व्यवस्था तैयार करने की योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के मुताबिक, शहर की पेयजल आपूर्ति को प्रभावित किए बिना मेट्रो परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए अलग जल परिवहन पाइपलाइन बनाने की योजना है। इसका उद्देश्य मौजूदा जलापूर्ति व्यवस्था को सुरक्षित रखते हुए मेट्रो निर्माण का रास्ता साफ करना है। नई व्यवस्था तैयार होने के बाद निर्माण के दौरान पुरानी पाइपलाइनों पर निर्भरता का दबाव कम किया जा सकेगा। इससे पेयजल आपूर्ति और मेट्रो निर्माण दोनों को साथ लेकर चलने की कोशिश होगी। सरकार इसे एकीकृत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है। इससे परियोजना में लंबे समय से चली आ रही तकनीकी अड़चन दूर होने की उम्मीद है।
उत्तर कोलकाता के लाखों यात्रियों को होगा फायदा
बारानगर से बैरकपुर के बीच मेट्रो सेवा शुरू होने से उत्तर कोलकाता और आसपास के इलाकों के यात्रियों को बड़ी राहत मिल सकती है। बीटी रोड पर रोजाना बड़ी संख्या में लोग बस, निजी वाहन और अन्य साधनों से सफर करते हैं। मेट्रो शुरू होने के बाद यात्रियों को तेज और अपेक्षाकृत सुगम परिवहन विकल्प मिल सकेगा। सड़क पर वाहनों का दबाव कम होने से यातायात व्यवस्था में भी सुधार की उम्मीद है। बारानगर, कमरहटी, पनिहाटी, सोदपुर, खरदाह और टीटागढ़ जैसे इलाकों के लोगों को सीधा लाभ मिल सकता है। इससे शहर के उत्तरी हिस्से की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और मजबूत होगी। लंबे समय से इस परियोजना का इंतजार कर रहे यात्रियों के लिए एनओसी मिलना बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
16 साल बाद फिर शुरू होगी उम्मीद
करीब डेढ़ दशक से ज्यादा समय से अटकी पिंक लाइन परियोजना को अब नई गति मिलने की उम्मीद है। एनओसी जारी होने के बाद निर्माण से जुड़ी आगे की प्रक्रियाओं पर काम किया जा सकेगा। सरकार की ओर से पाइपलाइन की समस्या का समाधान निकालने की बात कही गई है। इसके साथ ही परियोजना को जमीन पर उतारने की दिशा में प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर कदम बढ़ने की संभावना है। बारानगर-बैरकपुर रूट को उत्तर कोलकाता के लिए महत्वपूर्ण परिवहन परियोजना माना जाता है। मेट्रो का विस्तार पूरा होने पर क्षेत्र के लोगों को सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने का विकल्प मिलेगा। 16 साल के लंबे इंतजार के बाद अब इस परियोजना के पूरा होने की उम्मीद एक बार फिर मजबूत हुई है।