नगर निगम में विपक्ष को बैठक की सूचना दिए बिना अधिवेशन आयोजित किए जाने और कामकाज में कथित मनमानी को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है। विपक्षी पार्षदों ने नगर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अनदेखी कर निगम का संचालन किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मेयर पर मनमानी का आरोप, बोर्ड भंग करने की चेतावनी
विपक्षी पार्षदों ने आरोप लगाया है कि मेयर की ओर से नियमों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से बैठकों का आयोजन किया गया। पार्षदों का कहना है कि यदि नगर निगम की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ और पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई, तो पुर-बोर्ड (नगर निगम बोर्ड) को तत्काल भंग करने की मांग उठाई जाएगी। जरूरत पड़ने पर एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त करने की मांग भी की जाएगी।
अविश्वास प्रस्ताव को लेकर बढ़ी हलचल
नगर निगम की राजनीति में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर भी हलचल तेज हो गई है। असंतुष्ट पार्षदों का दावा है कि यदि अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लाया जाता है, तो मेयर की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है। विपक्ष का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में निगम प्रशासन जनता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर रहा है।
कमिश्नर और शहरी विकास मंत्री से होगी औपचारिक शिकायत
विपक्षी पार्षदों ने नगर निगम कमिश्नर और नगर एवं शहरी विकास मंत्री को इस पूरे मामले में औपचारिक शिकायत देने की तैयारी शुरू कर दी है। उनका आरोप है कि निगम में कई स्तरों पर अनियमितताएं हो रही हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। पार्षदों ने प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग करते हुए मामले को उच्च स्तर तक ले जाने का संकेत दिया है।
नगर राजनीति में बढ़ सकता है टकराव
नगर निगम में बढ़ते विवाद के बीच आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। यदि विपक्ष अपनी रणनीति के तहत अविश्वास प्रस्ताव लाता है या बोर्ड भंग करने की मांग को लेकर आंदोलन तेज करता है, तो नगर की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।