शांतिनिकेतन (बीरभूम): पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान बीरभूम जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया। विश्व प्रसिद्ध चित्रकार नंदलाल बसु के पोते सुप्रबुद्ध सेन और उनकी पत्नी दीपा बसु को मतदान केंद्र से बिना वोट दिए वापस लौटना पड़ा। हालांकि, मामला बढ़ने और चुनाव आयोग के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार शाम 5 बजे उन्होंने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद मिली निराशा
गुरुवार सुबह सुप्रबुद्ध सेन अपनी पत्नी के साथ शांतिनिकेतन के एक मतदान केंद्र पर पहुंचे थे। गौरतलब है कि इन दोनों का नाम मतदाता सूची से कटने का मामला सुप्रीम कोर्ट और ट्रिब्यूनल तक पहुंचा था, जहां शीर्ष अदालत ने आयोग को पूर्ण सहयोग करने का निर्देश दिया था। लेकिन जब वे बूथ पर पहुंचे, तो ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों ने सूची में नाम न होने का हवाला देकर उन्हें रोक दिया।
प्रशासन की अजीब शर्त
पीड़ित दंपत्ति ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी भी दिखाई, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें सिउड़ी स्थित जिला मजिस्ट्रेट (DM) कार्यालय से लिखित अनुमति लाने को कहा। भीषण गर्मी के कारण वृद्ध दंपत्ति इतनी दूर जाने में असमर्थ थे और दुखी होकर घर लौट गए। इस घटना के बाद चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठने लगे और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई।
आयोग के दखल से हुई वोटिंग
जैसे ही यह मामला चुनाव आयोग के संज्ञान में आया, तुरंत प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की गई। आयोग के निर्देश के बाद जटिलता दूर हुई और अधिकारियों ने सुप्रबुद्ध सेन को सूचित किया कि वे वोट डाल सकते हैं। इसके बाद शाम 5 बजे ससम्मान उन्हें मतदान कराया गया। इस घटना ने एक ओर जहां प्रशासनिक समन्वय पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग की तत्परता ने एक प्रतिष्ठित परिवार के लोकतांत्रिक अधिकार की रक्षा की।