कोलकाता: उत्तर बंगाल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जन-जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, जबकि प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
भारी बारिश से नदियां उफान पर, बढ़ा बाढ़ का खतरा
शनिवार रात से जारी तेज बारिश के कारण तीस्ता, तोरसा, महानंदा, संकोष और जलढाका समेत कई नदियां उफान पर हैं। जलस्तर लगातार बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा गहरा गया है। प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और संवेदनशील क्षेत्रों में राहत एवं बचाव की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
भू-स्खलन से मिरिक मार्ग पूरी तरह बंद
दार्जिलिंग-मिरिक मार्ग पर शनिवार रात भारी बारिश के चलते भू-स्खलन हो गया। पहाड़ों से बड़े-बड़े पत्थर सड़क पर गिरने से मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया और रविवार सुबह से यातायात पूरी तरह ठप है। प्रशासन मलबा हटाने के कार्य में जुटा हुआ है, हालांकि सड़क को सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।
कूचबिहार और अलीपुरदुआर में बाढ़ जैसे हालात
कूचबिहार के हरिपुर क्षेत्र में कम से कम 50 घरों में पानी घुस गया है, जिससे कई परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। वहीं भारत-भूटान सीमा से सटे अलीपुरदुआर के जयगांव इलाके में भी बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्रशासन प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने में जुटा हुआ है।
नदी किनारे रहने वाले लोगों को किया जा रहा सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तीस्ता, तोरसा, महानंदा, संकोष और जलढाका नदियों के किनारे बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। जिला प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे जाने से बचने और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।
बारिश जारी रही तो और बिगड़ सकते हैं हालात
रविवार सुबह कूचबिहार उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुकुमार राय ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने बताया कि कई परिवार बेघर हो चुके हैं और प्रशासन की ओर से उनके भोजन व ठहरने की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहा, तो उत्तर बंगाल के और अधिक इलाके बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं।
प्रशासन अलर्ट मोड पर
लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन टीम और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर हैं। राहत एवं बचाव दल संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात हैं और लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है।