कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी खींचतान के बीच सबीना यास्मीन के इस्तीफे ने नए सिरे से चर्चा शुरू कर दी है। उन्होंने महिला तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के लिए झटके के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, सबीना यास्मीन ने अपने इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और पारिवारिक परिस्थितियों को वजह बताया है।
स्वास्थ्य और पारिवारिक परिस्थितियों का दिया हवाला
सबीना यास्मीन ने संगठन की जिम्मेदारी छोड़ने का फैसला ऐसे समय लिया है, जब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक व्यवस्था को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने अपने फैसले की जानकारी संबंधित नेताओं को दी है। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में उनके लिए संगठन की जिम्मेदारी को पूरी तरह निभाना संभव नहीं है।
पूरे राज्य में दौरा करना हो रहा था मुश्किल
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाने के लिए राज्य के अलग-अलग हिस्सों में जाकर कार्यकर्ताओं और महिला संगठन के सदस्यों के साथ संपर्क बनाए रखना जरूरी होता है। सबीना यास्मीन के मुताबिक, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उनके लिए लगातार यात्रा करना संभव नहीं है। इसी वजह से उन्होंने पद पर बने रहने के बजाय इस्तीफा देने का फैसला किया।
ऋतब्रत बनर्जी गुट से जुड़ा है मामला
सबीना यास्मीन का इस्तीफा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वह ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट से जुड़ी थीं। इस गुट की ओर से उन्हें महिला संगठन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। ऐसे में उनका पद छोड़ना संगठन के भीतर चल रही राजनीतिक गतिविधियों के बीच एक अहम घटनाक्रम बन गया है।
तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर चर्चा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक समीकरणों को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में सबीना यास्मीन के इस्तीफे को देखा जा रहा है। हालांकि, उनके इस्तीफे को सीधे तौर पर किसी राजनीतिक मतभेद का परिणाम बताने की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने खुद स्वास्थ्य और पारिवारिक परिस्थितियों को ही अपने फैसले की वजह बताया है।
आगे किसे मिलेगी जिम्मेदारी?
सबीना यास्मीन के इस्तीफे के बाद अब महिला संगठन की जिम्मेदारी किसे दी जाएगी, इस पर नजर रहेगी। उनके फैसले से ऋतब्रत बनर्जी गुट के संगठनात्मक समीकरणों को लेकर सवाल जरूर उठे हैं, लेकिन आगे की रणनीति और नए अध्यक्ष के नाम को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।