कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में SIR और चुनाव प्रक्रिया को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल में SIR की प्रक्रिया सही तरीके से पूरी नहीं हुई। समिक भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी के SIR को लेकर दिए गए बयान का समर्थन भी किया। साथ ही उन्होंने दावा किया कि अगर राज्य में दोबारा SIR कराया जाता है, तो कम से कम 30 लाख नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण से सम्मानित करने की मांग भी की।
रैली और ममता बनर्जी के बयान पर साधा निशाना
समिक भट्टाचार्य ने आज की रैली और सोनिया गांधी को ममता बनर्जी द्वारा 'मैडम' कहकर संबोधित करने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इससे पहले प्रश्नपत्र को लेकर जो आंदोलन हुआ था, उसमें लोगों का दर्द, चिंता और आक्रोश शामिल था। लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी को भी विरोध करने का अधिकार है और शुरुआती तौर पर उस आंदोलन की प्रासंगिकता भी थी। हालांकि, उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी पश्चिम बंगाल की धरती पर खड़े होकर ज्ञानेश कुमार और चुनाव प्रक्रिया के खिलाफ खुलकर कुछ नहीं कह पा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि ममता बनर्जी और उनके नेता डायमंड हार्बर, संदेशखाली या सिउड़ी में जाकर ये बातें क्यों नहीं कहते? उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोगों ने स्वतंत्र और शांतिपूर्ण चुनाव देखे हैं, इसलिए इस तरह की बयानबाजी का कोई औचित्य नहीं है।
भारत के लोकतंत्र का किया जिक्र
समिक भट्टाचार्य ने बंगाल के लोगों को संदेश देते हुए कहा कि भारत में लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी हैं। भारत केवल दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की एक मजबूत मिसाल भी है। उन्होंने ग्रीस का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लोकतांत्रिक व्यवस्था को आगे नहीं बढ़ाया जा सका, जबकि भारत ने लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया को मतपत्र के इस्तेमाल का तरीका सिखाया है। समिक भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि जो लोग देश में अराजकता पैदा कर रहे हैं और राज्यसभा की कार्यवाही नहीं चलने दे रहे हैं, वही लोग इस तरह के रास्ते अपना रहे हैं।
SIR पर ममता बनर्जी के बयान का किया समर्थन
SIR को लेकर ममता बनर्जी के बयान पर समिक भट्टाचार्य ने कहा कि वह उनकी बात से सहमत हैं। उन्होंने माना कि पश्चिम बंगाल में जिस तरीके से SIR की प्रक्रिया पूरी की गई, वह सही नहीं था।उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के दौरान बीडीओ पर हमले हुए। भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल पर हमला कर उन्हें गाड़ी से बाहर निकाला गया। इसके अलावा, एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समाज के प्रतिष्ठित लोगों के नाम गलत तरीके से व्यवस्था में अपलोड किए गए। समिक भट्टाचार्य के मुताबिक, बंगाल में SIR की प्रक्रिया ठीक ढंग से नहीं हुई है। इसलिए राज्य में एक बार फिर SIR कराने की जरूरत है।
दोबारा SIR होने पर 30 लाख नाम कटने का दावा
समिक भट्टाचार्य ने दावा किया कि अगर पश्चिम बंगाल में दोबारा SIR कराया जाता है, तो कम से कम 30 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में SIR की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण देने की मांग
अपने बयान के अंत में समिक भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी बड़ी मांग रखी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में ज्ञानेश कुमार को हीरो की तरह देखा जा रहा है। भारत सरकार को बंगाल के लोगों की मांग स्वीकार करते हुए उन्हें पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित करना चाहिए। उनके इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल में SIR, चुनाव आयोग और आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।