कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और आम जनता तक सीधी पहुंच बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित और प्रभावी समाधान के उद्देश्य से 'जनता दरबार' की शुरुआत की है। यह जनता दरबार कोलकाता के साल्ट लेक स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश कार्यालय में आयोजित किया जा रहा है।
इस साप्ताहिक जनसुनवाई में राज्य भर से बड़ी संख्या में नौकरी चाहने वाले युवा, मरीज और आम नागरिक अपनी व्यक्तिगत परेशानियां, वित्तीय सहायता की मांगें और स्थानीय नागरिक मुद्दों से जुड़ी शिकायतें लेकर सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष रख रहे हैं। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य आम जनता की बात को बिना किसी नौकरशाही (Bureaucratic) रुकावट के सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाना है।हालांकि, इस जनता दरबार में शामिल होने और मुख्यमंत्री से मुलाकात करने के लिए एक बेहद व्यवस्थित और अनिवार्य प्रक्रिया तय की गई है। बिना इस प्रक्रिया का पालन किए कोई भी व्यक्ति जनता दरबार में प्रवेश नहीं कर सकता।

बिना बिचौलियों के सीधे निवारण: जानें टोकन और रजिस्ट्रेशन का पूरा प्रोसेस
यदि आप भी इस जनता दरबार में अपनी शिकायत लेकर जाना चाहते हैं, तो इन नियमों को जानना बेहद जरूरी है: प्राथमिक हेल्प डेस्क काउंटर: आवेदक को सबसे पहले साल्ट लेक स्थित भाजपा कार्यालय में बनाए गए विशेष काउंटर पर जाना होगा। वहां अपनी शिकायत या समस्या की लिखित जानकारी के साथ-साथ उससे जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।
अधिकारियों द्वारा ऑन-स्पॉट प्रयास: काउंटर पर मौजूद अधिकारी सबसे पहले खुद उस स्तर पर शिकायत का समाधान करने का प्रयास करेंगे। यदि समस्या का निस्तारण प्राथमिक स्तर पर ही हो जाता है, तो आवेदक को मुख्यमंत्री से मिलने की आवश्यकता नहीं होगी।
टोकन का आवंटन: यदि अधिकारियों को लगता है कि मामला गंभीर है और इसे मुख्यमंत्री के समक्ष ही रखा जाना चाहिए, तो आवेदक का नाम, मोबाइल नंबर और शिकायत का पूरा विवरण दर्ज कर एक टोकन नंबर दिया जाएगा। इस प्रक्रिया के दौरान पहचान के तौर पर वोटर आईडी, आधार कार्ड या अन्य वैध आईडी की जानकारी भी दर्ज की जा सकती है।
कॉल के जरिए बुलावा: प्राथमिक पंजीकरण पूरा होने के बाद आवेदक को घर लौटना होता है। जनता दरबार के आयोजन से सामान्यतः दो से तीन दिन पहले भाजपा कार्यालय की ओर से संबंधित व्यक्ति को फोन कर निर्धारित तिथि और समय की सूचना दी जाती है। तय दिन पर आवेदक को अपना टोकन और सभी मूल (ओरिजिनल) दस्तावेज लेकर उपस्थित होना होता है।

कोई ऑनलाइन माध्यम नहीं, केवल अधिकृत तरीका ही मान्य
पार्टी और मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया गया है कि सुबह से कतार में लग जाने या बिना पंजीकरण के आने वाले लोगों को जनता दरबार में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, इस पूरी प्रक्रिया को ऑफलाइन ही रखा गया है; ऑनलाइन माध्यम से रजिस्ट्रेशन की कोई व्यवस्था नहीं है।
पार्टी ने राज्य भर से आने वाले लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के भ्रम या बिचौलियों की ठगी का शिकार न हों और शिकायत दर्ज कराने के लिए केवल इसी अधिकृत व्यवस्था का सहारा लें। राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, मई 2026 में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के ठीक बाद शुरू की गई यह पहल तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पिछले शासनकाल के मुकाबले एक नई और जवाबदेह शासन शैली को प्रदर्शित करने की रणनीति का हिस्सा है।