रामपुरहाट, वीरभूम: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार, 29 अगस्त 2026, को वीरभूम जिले के प्रसिद्ध शक्तिपीठ तारापीठ मंदिर में पहुंचकर मां तारा के दर्शन किए। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद वीरभूम के अपने पहले आधिकारिक दौरे के दौरान उन्होंने विशेष पूजा-अर्चना की और राज्यवासियों की शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की। तारापीठ पहुंचने पर मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन की ओर से मुख्यमंत्री का स्वागत किया गया। पीले उत्तरीय में मंदिर पहुंचे सुवेंदु अधिकारी ने पूजा के बाद आगामी कौशिकी अमावस्या को लेकर प्रशासनिक तैयारियों का भी जायजा लिया।
मां तारा की पूजा के बाद श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर जोर
पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के सम्मान के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि तारापीठ का सबसे बड़ा वार्षिक आयोजन कौशिकी अमावस्या नजदीक है। इस अवसर पर देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
“मां तारा के आशीर्वाद से बनी है सरकार”
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में मां तारा के प्रति आस्था व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सरकार मां तारा के आशीर्वाद से बनी है। उन्होंने श्रावणी मेला और हाल में संपन्न कांवड़ यात्रा के दौरान प्रशासन की ओर से किए गए इंतजामों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ उनकी सुरक्षा और सुविधा का ध्यान रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
वीरभूम की सांस्कृतिक पहचान का किया उल्लेख
सुवेंदु अधिकारी ने वीरभूम की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वीरभूम केवल एक प्रशासनिक जिला नहीं है, बल्कि यह मां तारा की सिद्धभूमि, बाउल संस्कृति की भूमि और रवींद्रनाथ ठाकुर से जुड़ी ऐतिहासिक धरती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जिले की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित करने तथा पर्यटन की संभावनाओं को विकसित करने की दिशा में काम करेगी।
कई प्रमुख धार्मिक स्थलों का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने हाल के धार्मिक दौरों का उल्लेख करते हुए बताया कि पदभार संभालने के बाद उन्होंने राज्य के कई प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों का दौरा किया है। इनमें कालीघाट, जलपेश मंदिर, तारकेश्वर, रामकृष्ण मठ-मिशन, भारत सेवाश्रम संघ और इस्कॉन जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को समझना तथा उससे जुड़े लोगों की आवश्यकताओं को जानना सरकार के लिए महत्वपूर्ण है।
पिछली सरकार पर ‘ना’ की राजनीति का आरोप
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार की नीति हर काम के लिए ‘ना’ कहने की थी। इसके विपरीत उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार का दृष्टिकोण जनता और आस्था से जुड़े कार्यों में सकारात्मक निर्णय लेने का है।
कौशिकी अमावस्या को लेकर प्रशासनिक समीक्षा
तारापीठ मंदिर में दर्शन के बाद मुख्यमंत्री रामपुरहाट के रक्तकरबी ऑडिटोरियम पहुंचे। यहां उन्होंने जिले के वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर आगामी कौशिकी अमावस्या की तैयारियों की समीक्षा की।
बैठक में मुख्य रूप से इन मुद्दों पर चर्चा और समीक्षा की गई:
- श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन
- मेला क्षेत्र में बैरिकेडिंग
- सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था
- यातायात एवं पार्किंग प्रबंधन
- पुलिस बल की तैनाती
- आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं
- अग्निशमन एवं आपदा प्रबंधन व्यवस्था
- श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं
हाल ही में तारापीठ में हुई आग की घटना की पृष्ठभूमि में फायर सेफ्टी और होटल-धर्मशाला सुरक्षा को भी विशेष महत्व दिए जाने की संभावना है।
लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए तैयारियां तेज
कौशिकी अमावस्या के दौरान तारापीठ में भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में मुख्यमंत्री के दौरे को आगामी धार्मिक आयोजन से पहले प्रशासनिक तैयारियों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार के सामने श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही, भीड़ को नियंत्रित रखना और आपात स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराना प्रमुख चुनौतियां रहेंगी। तारापीठ में पूजा और प्रशासनिक समीक्षा के जरिए मुख्यमंत्री ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ सुरक्षा, पर्यटन और प्रशासनिक तैयारियों को भी अपने दौरे के केंद्र में रखा।