कोलकाता: पश्चिम बंगाल के उद्योग मंत्री तापस राय ने राज्य में औद्योगिक विकास, भूमि नीति और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता को लेकर बड़ा बयान दिया है। अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उद्योग विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण अधिकार और व्यवस्थाएं फिलहाल उनके हाथ में नहीं हैं। उन्होंने विशेष रूप से लैंड बैंक, लैंड पॉलिसी और इंसेंटिव का जिक्र करते हुए कहा कि जल्द ही इनसे जुड़ी नीतियों और व्यवस्थाओं को स्पष्ट किया जाएगा। तापस राय ने वित्तीय पारदर्शिता और सरकारी कामकाज में जवाबदेही पर भी जोर दिया। उन्होंने ऑडिट और वित्त अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों के कामकाज की जानकारी स्पष्ट रूप से सामने आए और वित्तीय मामलों में किसी तरह की अनियमितता की गुंजाइश न रहे।
‘मेरे हाथ में लैंड बैंक और इंसेंटिव नहीं’
उद्योग मंत्री ने कहा कि वह स्टार्टअप और उद्योग से जुड़े विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, लेकिन फिलहाल लैंड बैंक, लैंड पॉलिसी और इंसेंटिव जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं उनके सीधे नियंत्रण में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस महीने नीति से जुड़ी सूची सामने आ जाएगी। इसके बाद लैंड बैंक समेत उद्योग विभाग से जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं की तस्वीर भी स्पष्ट हो जाएगी। मंत्री के इस बयान को राज्य में औद्योगिक निवेश और नए उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लैंड बैंक और औद्योगिक प्रोत्साहन की स्पष्ट नीति होने से निवेशकों के लिए उपलब्ध जमीन और सरकार की ओर से मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी अधिक स्पष्ट हो सकती है।
‘पहले देखने तक नहीं दिया जाता था’
तापस राय ने अधिकारियों के सामने पुराने कामकाज के तरीके पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले कई मामलों को सिर्फ देखा नहीं जाता था, बल्कि अधिकारियों को उन्हें देखने की अनुमति भी नहीं दी जाती थी। उन्होंने ऑडिट और वित्त अधिकारियों को संबोधित करते हुए सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में सत्ता संभालने के बाद सरकार जिन क्षेत्रों में काम कर रही है, वहां कई जगहों पर पारदर्शिता और ईमानदारी से जुड़े सवाल सामने आ रहे हैं। उनके मुताबिक, इन मामलों को दबाने के बजाय व्यवस्था को बेहतर बनाने और वास्तविक स्थिति सामने लाने की जरूरत है।
‘जनता के सामने रखा जाएगा पूरा हिसाब’
उद्योग मंत्री ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता और ईमानदारी को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि सरकारी कामकाज और वित्तीय मामलों से जुड़ी जानकारी को जनता के सामने रखने की दिशा में काम किया जाएगा। तापस राय के मुताबिक, सरकार किसी भी वित्तीय मामले को छिपाने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि सरकारी धन का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है और अलग-अलग विभागों में किस तरह के फैसले लिए जा रहे हैं।
विभागों और नगरपालिकाओं के कामकाज पर भी सवाल
तापस राय ने स्थानीय निकायों, अलग-अलग सरकारी विभागों और नगरपालिकाओं में कथित मनमानी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर जिस तरह से काम किया गया, उसकी जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किन लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी और कितने लोग इसके लिए जिम्मेदार पाए जाएंगे, यह जांच और तथ्यों के सामने आने के बाद ही तय किया जा सकेगा। उन्होंने संकेत दिया कि यदि किसी मामले में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
‘वित्तीय पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं’
उद्योग मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि वित्तीय पारदर्शिता और ईमानदारी के मामले में सरकार किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी। उन्होंने अधिकारियों से सरकारी धन और विभागीय कामकाज से जुड़े मामलों में पूरी जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि केवल नीतियां बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनका पालन सही तरीके से हो। इसके लिए अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है और उन्हें हर स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी।
‘ऐसी चर्चा पहले नहीं सुनी’
तापस राय ने कहा कि उन्होंने इससे पहले इस तरह की चर्चा नहीं सुनी थी। उन्होंने कहा कि कितने वर्षों बाद इस स्तर पर पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही को लेकर इस तरह की चर्चा हो रही है, यह वह नहीं जानते। हालांकि, उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि पहले सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता का स्तर कितना था। उनके बयान से संकेत मिलता है कि सरकार अब विभागीय कामकाज में निगरानी और जवाबदेही को अधिक मजबूत करने की कोशिश कर रही है। खास तौर पर उद्योग विभाग में भूमि, नीतियों और निवेश प्रोत्साहन से जुड़े मामलों को अधिक स्पष्ट बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
आगे क्या होगा?
तापस राय के मुताबिक, इसी महीने उद्योग से जुड़ी नीतियों की सूची सामने आने की उम्मीद है। इसके बाद लैंड बैंक, भूमि नीति और निवेश प्रोत्साहन से संबंधित व्यवस्थाओं को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि नई नीतियां सामने आने के बाद राज्य में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने, उद्योगों के लिए जमीन उपलब्ध कराने और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
तापस राय का बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब राज्य में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के साथ-साथ सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी चर्चा हो रही है। मंत्री ने अधिकारियों को साफ संदेश दिया है कि वित्तीय मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। अब नई औद्योगिक नीतियों और लैंड बैंक से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद सरकार के इन दावों की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।