नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी आंतरिक घमासान अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर बगावत का मामला अब संसद से निकलकर राज्य की राजनीति तक पहुंच गया है। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाला खेमा बागी नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। पहले बागी सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की प्रक्रिया शुरू की गई और अब बागी विधायकों पर भी कार्रवाई की रणनीति बनाई जा रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल और बढ़ गई है।
लोकसभा सचिवालय ने 20 बागी सांसदों को भेजा नोटिस
लोकसभा सचिवालय ने तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस 25 अगस्त को जारी किया गया, जिसमें सांसदों से अयोग्यता याचिकाओं पर अपना पक्ष रखने को कहा गया है। सांसदों को एक सप्ताह के भीतर अपनी सफाई और टिप्पणियां लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष दाखिल करनी होंगी। यह कार्रवाई दलबदल विरोधी कानून के तहत शुरू हुई प्रक्रिया का हिस्सा है। बताया गया है कि अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर याचिका पर संज्ञान लेते हुए यह कदम उठाया गया। अब बागी सांसदों के जवाब के बाद मामले में आगे की प्रक्रिया बढ़ेगी। इस घटनाक्रम से TMC के भीतर चल रही खींचतान और तेज हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने समयबद्ध कार्रवाई के दिए निर्देश
बागी सांसदों की अयोग्यता का मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पीकर के समक्ष लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर समयबद्ध तरीके से विचार करने का निर्देश दिया है। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत के निर्देश के बाद अब इस मामले में लंबे समय तक देरी की संभावना कम हो गई है। इससे ममता बनर्जी गुट को बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। वहीं, बागी सांसदों के सामने भी अब अपना पक्ष मजबूती से रखने की चुनौती है। पूरे मामले पर बंगाल की राजनीति की नजर बनी हुई है।
सांसदों के बाद अब बागी विधायकों पर नजर
TMC के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने संकेत दिया है कि बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई पूरी होने के बाद राज्य के बागी विधायकों पर भी अगला कदम उठाया जा सकता है। ममता बनर्जी खेमे की ओर से इसे पार्टी में अनुशासन कायम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के कई बागी विधायक अब भी नेतृत्व के संपर्क में हैं। दावा है कि इनमें से कुछ विधायक जल्द ही पार्टी में वापस लौट सकते हैं। वहीं, जो विधायक वापसी नहीं करेंगे, उनके खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में नई सियासी हलचल देखने को मिल सकती है। इसे ममता बनर्जी खेमे की बागियों के खिलाफ रणनीतिक कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।
ममता गुट की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ रणनीति
पार्टी के भीतर बगावत के बाद ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी खेमा अब संगठन को दोबारा मजबूत करने की कोशिश में जुटा है। बागी सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब विधायकों पर भी कार्रवाई की तैयारी को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, नेतृत्व उन नेताओं को दोबारा अपने साथ लाने की कोशिश कर रहा है जो अभी भी बातचीत के लिए तैयार हैं। वहीं, खुले तौर पर विरोध कर रहे नेताओं के खिलाफ कानूनी और संगठनात्मक कार्रवाई की तैयारी है। इससे पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। नेतृत्व का फोकस बगावत को रोकने और संगठन पर पकड़ मजबूत करने पर है। आने वाले दिनों में यह रणनीति TMC के राजनीतिक भविष्य के लिए अहम हो सकती है।
बागी सांसदों का दावा- हमारा पक्ष मजबूत
दूसरी ओर, TMC से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटीजेंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए बागी सांसदों ने अपने पक्ष को मजबूत बताया है। बागी गुट की प्रमुख सांसद शताब्दी रॉय ने दावा किया है कि कानून की व्याख्या कई तरीकों से की जा सकती है। उनका कहना है कि उनके पास अलग होने के लिए आवश्यक दो-तिहाई से अधिक सांसदों का समर्थन है। उन्होंने संकेत दिया कि बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष के सामने तय समय सीमा के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करेंगे। बागी गुट का मानना है कि उनका अलग होना दलबदल विरोधी कानून के दायरे में नहीं आएगा। हालांकि, इस दावे पर अंतिम फैसला संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही होगा। अब सबकी नजर बागी सांसदों के जवाब और लोकसभा अध्यक्ष के अगले कदम पर है।
TMC में बढ़ती अंदरूनी खींचतान
पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक सत्ता में रही TMC के लिए यह संकट संगठनात्मक स्तर पर बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। चुनावी हार के बाद सांसदों और नेताओं के एक बड़े समूह के बागी होने से पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठे हैं। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के सामने अब पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने के साथ-साथ बागियों को संभालने की चुनौती है। एक तरफ नेतृत्व बागी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, तो दूसरी तरफ कुछ नेताओं की घर वापसी की कोशिश भी जारी है। इससे साफ है कि पार्टी के भीतर संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में सांसदों और विधायकों के खिलाफ कार्रवाई इस राजनीतिक संकट की दिशा तय कर सकती है। बंगाल की राजनीति में TMC का यह अंदरूनी संघर्ष फिलहाल सबसे अहम मुद्दों में से एक बना हुआ है।