कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता के गलियारों में आया राजनीतिक भूचाल अब पूरी तरह सतह पर आ चुका है। राज्य की राजनीति में दशकों तक दबदबा रखने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) आज आड़ा-तिरछा विभाजित नजर आ रही है। विभाजन के इस दौर में आज, मंगलवार को ऐतिहासिक '21 जुलाई शहीद दिवस' के अवसर पर राजधानी कोलकाता की सड़कों पर एक साथ तृणमूल के दो शक्ति प्रदर्शन देखने को मिले।एक तरफ जहां बीड़ला तारामंडल के सामने ममतपंथी 'कालीघाट तृणमूल' का जमावड़ा लगा, वहीं दूसरी तरफ मेयो रोड पर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाली 'ऋत-तृणमूल' ने अपना राजनीतिक दमखम दिखाया। इसी मेयो रोड के समानांतर शहीद मंच से बीरभूम के कद्दावर और हेवीवेट नेता अनुब्रत मंडल ने पार्टी तोड़ने की साजिशों के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया।
"तृणमूल आम लोगों की पार्टी, डर दिखाकर नहीं तोड़ सकते"
मेयो रोड की जनसभा को संबोधित करते हुए अनुब्रत मंडल ने आक्रामक अंदाज में कहा कि जो लोग तृणमूल कांग्रेस को कमजोर समझ रहे हैं, वे भारी भूल कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "तृणमूल को डरा-धमकाकर तोड़ा नहीं जा सकता। तृणमूल आगे और बड़ी होगी तथा हर परिस्थिति में जनता के साथ खड़ी रहेगी। यह वही तृणमूल कांग्रेस है जो हमेशा आम जनता, पिछड़े वर्ग, गरीबों, दिहाड़ी मजदूरों, किसानों और बेरोजगार युवाओं के अधिकारों के लिए लड़ती आई है और आगे भी लड़ेगी। इसी का नाम तृणमूल है"समर्थकों का उत्साह बढ़ाते हुए अनुब्रत ने आगे कहा, "आज आप जिस तृणमूल को देख रहे हैं, अगली बार इसका और भी विराट रूप देखने को मिलेगा। यह पार्टी केवल और केवल जनता के लिए है। आज शहीद परिवारों के त्याग और बलिदान की बदौलत ही तृणमूल का यह विस्तार हुआ है।"

मंच पर जुटे दिग्गजों के चेहरे, शहीद परिवारों की मौजूदगी
राजनीतिक समीकरणों के इस महासंग्राम में मेयो रोड के मंच पर केवल अनुब्रत ही नहीं, बल्कि 'ऋत-तृणमूल' के राज्य अध्यक्ष बिप्लब मित्रा सहित राज्य के कई जाने-माने चेहरे मौजूद रहे। मंच पर फिरहाद हकीम, स्नेहाशीष चक्रवर्ती, शिउली साहा, अरूप चक्रवर्ती, जावेद खान, देबाशीष कुमार, मदन मित्रा, कृष्णा चक्रवर्ती और रवींद्रनाथ चटर्जी जैसे वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति ने इस सभा का राजनीतिक वजन काफी बढ़ा दिया।इसके अलावा, 1993 के ऐतिहासिक 21 जुलाई पुलिस गोलीकांड में जान गंवाने वाले शहीद रणजीत दास, मोहम्मद खालिद, दिलीप दास और रतन मंडल के परिजनों ने भी ऋतब्रत बनर्जी के गुट की इस सभा में शिरकत कर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
दिल्ली में तर्पण, कोलकाता में गर्जना
दूसरी ओर, ममता बनर्जी गुट से जुड़ीं काकोली घोष दस्तीदार और अन्य नेताओं ने राजधानी दिल्ली स्थित राजघाट पहुंचकर शहीदों को नमन किया और तर्पण किया।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मैदान में जुटी भीड़ और जनसमूह के लिहाज से बीड़ला तारामंडल की ममतपंथी सभा की तुलना में मेयो रोड का 'ऋत-तृणमूल' शिविर थोड़ा पीछे जरूर दिखा, लेकिन अनुब्रत मंडल जैसे आक्रामक नेताओं की मौजूदगी और उनके बयानों ने बंगाल की राजनीति के पारे को एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया है।