कोलकाता: पश्चिम बंगाल में औद्योगिक विकास और नए निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की 'भारत औद्योगिक विकास योजना' (BHAVYA) को लागू करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। उद्योग, वाणिज्य और उद्यम विभाग के विशेष सचिव द्वारा जारी आदेश के अनुसार, पश्चिम बंगाल औद्योगिक अवसंरचना विकास निगम (WBIIDC) को राज्य की स्टेट नोडल एजेंसी (SNA) नामित किया गया है। राज्य सरकार इस योजना के तहत अपने प्रस्ताव अगस्त महीने के भीतर केंद्र सरकार को सौंपने की तैयारी कर रही है।
क्या है केंद्र सरकार की 'भव्य' (BHAVYA) योजना?
केंद्र सरकार की इस योजना के तहत अगले छह वर्षों में ₹33,660 करोड़ की लागत से देश भर में 100 'प्लग-एंड-प्ले' इंडस्ट्रियल पार्क बनाने का लक्ष्य है। इसका मुख्य उद्देश्य 'रेडी-टू-इन्वेस्ट' (निवेश के लिए तैयार) औद्योगिक क्षेत्र विकसित करना है, जहां निवेशकों को जमीन, बिजली, पानी, सड़क और ड्रेनेज जैसी बुनियादी सुविधाएं पहले से तैयार मिलेंगी। इन पार्कों में स्टार्टअप्स, डीप-टेक, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और इनोवेशन-आधारित उद्योगों के लिए विशेष स्थान आरक्षित रखा जाएगा।
बंगाल में दो प्रमुख स्थानों पर जमीन चिह्नित
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री तपन राय ने बताया कि योजना की शर्तों के अनुसार न्यूनतम 100 एकड़ का स्पष्ट मालिकाना हक और एनकंबरेंस-मुक्त (विवाद रहित) जमीन होना अनिवार्य है। राज्य सरकार ने इसके लिए दो स्थान चिह्नित किए हैं:
- नदिया का धुबुलिया: यहाँ लगभग 118.50 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है।
- पश्चिम बर्धमान: ढकेश्वरी कॉटन मिल क्षेत्र/हरिपुर में लगभग 148.61 से 193.29 एकड़ जमीन को संभावित स्थल के रूप में तय किया गया है।
डीपीआर (DPR) तैयार करने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू
उद्योग मंत्री तपन राय ने स्पष्ट किया कि केवल जमीन होना ही काफी नहीं है, बल्कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR), जमीन का कब्जा और अन्य तकनीकी शर्तें पूरी करनी होंगी। इसके लिए एजेंसी की नियुक्ति टेंडर के माध्यम से की जा रही है। एजेंसी का चयन होते ही डीपीआर बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
प्रस्तावों की रेस में देश के अन्य राज्य
प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के आधार पर चल रही इस योजना के पहले चरण में 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 87 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इसमें 14 प्रस्तावों के साथ महाराष्ट्र पहले स्थान पर है, जबकि मध्य प्रदेश 11 प्रस्तावों के साथ दूसरे और उत्तर प्रदेश व तमिलनाडु 7-7 प्रस्तावों के साथ अगले स्थानों पर हैं। पश्चिम बंगाल की नई सरकार अब इस योजना के माध्यम से राज्य को औद्योगिक मानचित्र पर आगे ले जाने का प्रयास कर रही है।