उत्तर 24 परगना : पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के श्यामनगर इलाके में बीजेपी विधायक के बेटे के जन्मदिन समारोह से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में एक आदिवासी महिला कथित तौर पर बीजेपी के जगद्दल विधायक राजेश कुमार के बेटे रित्विक कुमार के पैर पानी से धोती नजर आ रही हैं। इसके बाद रित्विक महिला के पैर छूते भी दिखाई देते हैं। घटना मंगलवार को कौगाछी गांव के आदिवासी इलाके में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुई बताई गई है।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट के मुताबिक, 34 वर्षीय रित्विक कुमार के जन्मदिन के मौके पर कौगाछी के आदिवासी पाड़ा में सामाजिक संपर्क से जुड़े करीब 23 कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। इन्हीं कार्यक्रमों में से एक के दौरान यह रस्म हुई। वायरल वीडियो में एक आदिवासी महिला पहले रित्विक के पैर धोती हैं और फिर उनके माथे पर तिलक लगाती दिखाई देती हैं। इसके बाद सामने आए वीडियो के एक लंबे संस्करण में रित्विक महिला के सामने झुककर उनके पैर छूते नजर आते हैं। रित्विक ने दोनों वीडियो की प्रामाणिकता स्वीकार की है।
रित्विक कुमार ने क्या सफाई दी?
विवाद बढ़ने के बाद रित्विक कुमार ने कहा कि पैर धोने की यह घटना पहले से तय नहीं थी और वह खुद भी ऐसा नहीं चाहते थे। उनके मुताबिक, महिला ने अपनी सांस्कृतिक परंपरा के तहत अचानक यह किया और वह तत्काल उन्हें रोक नहीं सके। रित्विक ने कहा कि उन्हें यह देखकर असहज महसूस हुआ था। उनका कहना है कि महिला का अपमान न हो, इस वजह से उन्होंने उसी समय उन्हें रोकने के बजाय बाद में उनके पैर छूकर सम्मान जताया। उन्होंने यह भी माना कि उन्हें पहले ही इस रस्म को रोक देना चाहिए था।
राजनीतिक विवाद क्यों बढ़ा?
वीडियो सामने आने के बाद विपक्ष और आदिवासी संगठनों ने सवाल उठाए हैं। CPM से जुड़ी नेता गार्गी चटर्जी ने वीडियो को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा और इसे सामाजिक बराबरी के दावों के विपरीत बताया। विवाद केवल इस बात तक सीमित नहीं है कि महिला ने यह काम अपनी इच्छा से किया या किसी दबाव में। इसके साथ सामाजिक बराबरी, सम्मान और राजनीतिक प्रभाव जैसे सवाल भी जुड़ गए हैं।
आदिवासी संगठन ने क्या कहा?
आदिवासी संगठन ‘दिशम आदिवासी गौंता’ के अध्यक्ष रबिन सोरेन ने भी इस घटना पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि किसी सम्मानित व्यक्ति के पैर धोने की परंपरा कुछ विशेष सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों में हो सकती है, लेकिन इसे किसी बाहरी व्यक्ति के लिए किए जाने को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
RSS से जुड़े संगठन ने भी जताई नाराजगी
मामले में RSS से जुड़े वनवासी कल्याण आश्रम के उत्तर 24 परगना के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने भी घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, ऐसी घटना से बचा जा सकता था और यह संगठन के उस उद्देश्य के विपरीत जाती है, जिसमें आदिवासी समुदाय के साथ सामाजिक दूरी कम करने की बात कही जाती है।
बीजेपी विधायक पक्ष की स्थिति
स्थानीय बीजेपी नेताओं ने इस मामले पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया देने से फिलहाल परहेज किया है। वहीं, रित्विक कुमार ने खुद कहा है कि इस घटना से उनके और बीजेपी के बारे में गलत संदेश गया है। उनका दावा है कि पैर धोने की रस्म न तो उनकी योजना थी और न ही उन्होंने किसी से ऐसा करने को कहा था।
अब विवाद का केंद्र क्या है?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रही रस्म को किस संदर्भ में देखा जाए—एक स्थानीय सांस्कृतिक परंपरा के रूप में या फिर राजनीतिक और सामाजिक शक्ति-संबंधों के प्रतीक के तौर पर। बीजेपी की आदिवासी समुदायों के बीच सामाजिक सम्मान और बराबरी की राजनीति के बीच यह वीडियो विपक्ष को हमला करने का मौका दे रहा है। फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक घटना को लेकर कोई ऐसी जानकारी सामने नहीं आई है जिससे यह साबित हो कि महिला से यह काम जबरन कराया गया था। इसलिए राजनीतिक आरोपों और वीडियो में दिखाई दे रही घटना के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।